आदि नारायण | Aadi Narayan
इस क्षर ब्रह्माण्ड के स्वामी क्षर पुरुष हैं, जिन्हें आदि नारायण या महा विष्णु भी कहते हैं ।
आदि नारायण से संसार की उत्पत्ति
तुम इस बात को स्पष्ट रूप से देखो कि (मोह से) पांचों तत्व उत्पन्न हुए हैं । इसी मोह (निराकार) के अन्दर मन (अक्षर ब्रह्म के मन अव्याकृत का स्वप्न स्वरूप आदि नारायण) खेलता है और सारा संसार उसी मन की उत्पत्ति है ।1
यहां अक्षर के मन का विलास हुआ । पांच तत्वों से चौहद भवन (लोक) बने । यहां (अक्षर के) मन से महाविष्णु उत्पन्न हुए, उन (महाविष्णु) के मन से त्रिगुण (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की उत्पत्ति हुई, और त्रिगुण से सभी चर-अचर प्राणियों की उत्पत्ति हुई ।2
आदि नारायण एक ही हैं, जिनके द्वारा अनेक ब्रह्माण्ड उत्पन्न होते हैं । प्रत्येक ब्रह्माण्ड में अलग-अलग ब्रह्मा, विष्णु और शिव होते हैं, जो अपनी आयु पूरी करके आदि नारायण में ही समा जाते हैं ।
(1) कलस हिन्दुस्तानी 17/24 (2) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/24
