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आनन्द | Aanand

जब हृदय में बहुत खुशी का अनुभव हो, तब उसे आनन्द कहते हैं । धाम में आनन्द ही आनन्द है, परन्तु संसार में अलौकिक अनुभव होने पर ही आनन्द की प्राप्ति मानी जाती है ।

आनन्द की प्राप्ति का मार्ग

जब यह (श्री कुलजम सरूप के ज्ञान के) सुख अंग (हृदय) में आते हैं, तब (माया के) विकार छूट जाते हैं और प्रियतम अक्षरातीत के अखण्ड घर (धाम) का आनन्द मिलता है ।1



(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/6