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ब्रह्माण्ड | Brahmaand

ब्रह्माण्ड के अन्तर्गत पृथ्वी सहित समस्त लोक, ग्रह और नक्षत्र आते हैं ।

यह सारा ब्रह्माण्ड एक कोहरे के समान है, जो छल (मोह, निराकार) से उत्पन्न हुआ है । इसे खेल या चौदह भवन (लोक) भी कहते हैं ।1

ब्रह्माण्ड का वृक्ष के रूप में चित्रण

विराट (ब्रह्माण्ड) का चलन उल्टा है । इसकी जड़ें आकाश में हैं और डालियां पाताल में पसरी हैं । ऐसा वेद का ज्ञान कहता है । (विराट रूपी वृक्ष की) फल और डालियां अदृश्य हैं और पाताल में छिपी हुई हैं । विराट और वेद दोनों कोहेड़ा (कोहरा, धुन्ध) के समान हैं । इनके रूप में छल का जाल गुंथा हुआ है ।2



(1) कलस हिन्दुस्तानी 17/27 (2) कलस हि. 16/1,2