ब्रह्मचर्य | Brahmacharya
ब्रह्मचर्य का अर्थ है ब्रह्म में विचरण करना ।
मानसिक ब्रह्मचर्य
मन को ब्रह्म के शुद्ध विचारों में लगाए रखना ही मानसिक ब्रह्मचर्य कहलाता है ।
शारीरिक ब्रह्मचर्य
अपने वीर्य या रज की रक्षा करना ही शारीरिक ब्रह्मचर्य है । जब कभी ब्रह्मचर्य की बात होती है, तो अधिकतर उसका अभिप्राय शारीरिक ब्रह्मचर्य से होता है ।
ब्रह्मचर्य के नियम
- परमात्मा का ध्यान
- जीवन में कोई बड़ा लक्ष्य होना
- मन को सदैव अच्छे कार्य में व्यस्त रखना
- पराई स्त्री को मां के समान समझना
- सत्संगति
- यौन क्रियाओं से परहेज
- अश्लील वीडियो, चित्र, पुस्तक, वार्ता से परहेज
- सात्विक आहार
- गरिष्ठ, गर्म, मांस आहार से परहेज
- रात्रि में अल्पाहार
