बड़ा कयामतनामा - प्रकरण ११ | Bada Kayamatnama prakaran 11
ए रोज नाहीं खिलाफ, होसी नव सदी आगूं मिलाप । कलाम अल्ला का जाहेर नूर, अग्यारे सिपारे का जहूर ॥१॥
ए लिख्या वास्ते सबब इन, बदले नेक खूब कारन । बीच राह हक के एक, तिन नेकों का बदला नेक ॥२॥
उनसों ज्यादा मिल्या है जित, बोहोतक सवाब लेना है तित । बोहोतायत बीच यों नबिएँ, सो मिसल गाजियों बीच जाहेर किए ॥३॥
तिन पर बंदगी एक करे कोए, सो हजार बंदगियों से नेक होए । तिनको सवाब बड़ा बुजरक, देवे एही साहेब हक ॥४॥
नव सै नब्बे हुए बरस, और नव मास उतरे सरस । तिनसे दूसरा होए मकबूल, सो ए बंदगियां करे कबूल ॥५॥
सो बकसीस करे सब ए, बदले एक के हजार दे । इनके बराबर ऐसे कर, कोसिस करे खुदाकी राह पर ॥६॥
खिलाफ राह चलें काफर, दुनियां को देखावें डर । ए जो सरत कही इस दिन, उस बखत उतरे मोमिन ॥७॥
होए आवाज लड़ाई बखत, तिस पर मोमिन करें कस्त । कस्त करें सब आरब, ए आयत उतरी हैं तब ॥८॥
ना रवा मोमिन ना चाहें, घर छोड़ बाहेर लड़ने को जाएँ । होए सेहेर उजाड़ बखत सोए, खाने पीने की ढील होए ॥९॥
जब पोहोंचे एह सरत, बाहेर न जाना तिन बखत । हर एक जमात बोहोत मेला, हर इन की सों मुराद किबला ॥१०॥
जिन सिर कह्या वह गाम, तिन छोड़ न जाए लड़ाई काम । बाकी लोक पीछे जो रहे, जब वह तलब दानाई चहे ॥११॥
जो कोई गाम के हैं, तिनको इलम दीन का कहे । सवा नव बरस दसमी के बाकी, इतथें मजकूर भई है ताकी ॥१२॥
॥ प्रकरण ॥११॥ चौपाई ॥३५१॥
