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बड़ा कयामतनामा - प्रकरण १४ | Bada Kayamatnama prakaran 14

औलाद याकूब कह्या इस्हाक, इनों का कबीला है पाक । पेहेले कही एही मजकूर, और बिध लिखी कर रोसन नूर ॥१॥

ए जो मिलाइयां हैं जंजीर, सो जुदे कर देऊं खीर और नीर । एही अगली फेर और बिध लिखी, सोई समझी चाहिए दिल में रखी ॥२॥

भेद न पाइए बिना तफसीर, ए दई सिच्छा महंमद फकीर । खासा मुरीद ए जब भया, बेटा नजरी एहिया को कह्या ॥३॥

ईसा को कर गाया खसम, कलाम अल्ला ताए कही हुरम । कुरान किताबें जिकर किया, नाम लिख्या ताको जिकरिया ॥४॥

जो बेटा नसली ईसे का था, सो कलाम अल्ला कहे जुदा रह्या । इन बिध केती कहूं जंजीर, कुरान कई भांतों तफसीर ॥५॥

हादिएँ इनको ऐसा किया, फरजंद मेरे मुद्दा लिया । हे परवरदिगार मेरे, कबूल हुआ रजामंदी तेरे ॥६॥

अव्वल कौल इनके बेसक, जिनमें राजी होवे हक । पीछे इस के सिजदे सिर, द्वा करे जारी कर कर ॥७॥

करम खुदाए का साहेब सिजदे, पोहोंच्या कौल मोंह वायदे । इन समें सब कबूल करे, एह द्वा दिल सारी धरे ॥८॥

खुसखबरी तोहे जिकरिया, देता हों मैं यों कर कह्या । ए बेटा तुझे बकसिया, कह्या नाम उसका एहिया ॥९॥

पैदा किया एहिया को देख, आगूं वह मैं नाम एक । बीच ल्‍याए जादलमिसल, भांत बुजरकी नाम नकल ॥१०॥

आगूं इस के ऐसा नहीं नाम, ना माफक इस के कोई काम । बोहोत हुए कह्या इन रसम, कोई हुआ न आदमी इन इस्म ॥११॥

बल्कि एही है बुजरक, किया खुदाए पैगंमर हक । ना कछू मेहेतारी ने पाले, बाप के ना हुए हवाले ॥१२॥

इमाम सालवी नकल आई, आगूं इस थें नकल फुरमाई । पीछे उसके ऐसा चहावे, बुजरकी बीच जहूरके ल्यावे ॥१३॥

पीछे उसके एते नाम लेवे, खासों में खासगी देवे । भांत भांत नाम जुदे बेसुमार, अपने नामें सब किए उस्तुवार ॥१४॥

आखिर अपने काम मजबूत, ए अरस परस नाम कह्या मेहेमूद । आखिर बुजरकी महंमद पर आई, खासी उमत महंमदें सराही ॥१५॥

इस्म धरे का माएना एह, ऐसी सबी कोई और न देह । ए तिस वास्ते ऐसा कह्या, गुनाह कस्त कोई जाहेर न भया ॥१६॥

हो साहेब मेरे जिकरिया यों केहेवे, मेरे फरजंद क्यों ऐसा होवे । मेरी औरत है इन हाली, सो तो नहीं जनने वाली ॥१७॥

अब मैं पोहोंच्या उमेद एती, बुजरकी पाइए इनसेती । ना कछू एती थी खबर, ना देहेसत लई दिल धर ॥१८॥

मोहे गरीबी और नातवान, ए बड़ाई आप सों हुई पेहेचान । होए पेहेचान जो मेरी चाहे, बिलंद करने जो कुदरत उठाए ॥१९॥

कहे फरिस्ते खुदा के हुकम, ए जिकरिया कह्या जो तुम । ए बात यों ही कर है, बुढ़ापा नातवानी कहे ॥२०॥

ए तेरे खुदाए ने कह्या, पैदा करने काम फरजंद का भया । कह्या बीच इस सिनसे, आसान खुदा के दो सकसों से ॥२१॥

तो सांचा एहिया पैदा किया, नाबूदसेंती बूद में लिया । बुजरकी सों खुदाए ने कही, जिकरिया फरजंद पोहोंच्या सही ॥२२॥

खुसखबरी सों हुआ खुसाल, पेहेले ना सुध थी वजूद इन हाल । ए बात जाहेर न जानी कबे, दूजे फेरे पोहोंचे इन मरतबे ॥२३॥

कहे जिकरिया साहेब मेरे, किन बिध वाका होसी तेरे । मेरी निसानी की खबर जेह, मोहे नहीं परत मालूम एह ॥२४॥

कह्या खुदाए ने निसानी तेरी, न सकेगा कहे हकीकत मेरी । मरदों से बात न होवे इन, केहेनी तीन रात और चौथा दिन ॥२५॥

ए बेटे नसली की जंजीर, ए पावें गिरो वचिखिन वीर । लैलत कदर के तीन तकरार, दिन फजर का खबरदार ॥२६॥

ए क्या जाने फरजंद पैगंमरी, ए खिताब दिया एहिया नजरी ॥२७॥

॥ प्रकरण ॥१४॥ चौपाई ॥४११॥

इसी सन्दर्भ में देखें-