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बड़ा कयामतनामा - प्रकरण १६ | Bada Kayamatnama prakaran 16

ए जंजीर सिपारे सोलमें मांहें, बरस सौ की मजल है जांहें । याद किया मांहें कुरान, किस्से इद्रीस की पेहेचान ॥१॥

बेटा नवासे साहेब का, बाप दादा नूह था । अबनूस था उसका नाम, इद्रीस लकब कह्या इस ठाम ॥२॥

ए लकब दिया है सांच कारन, मालूम हुआ वास्ते इन । अव्वल खत यों लिख्या कलाम, नजूम दरजी पना किया इसलाम ॥३॥

तीस वरक हुए नाजल, ऊपर जामें कहे असल । बीच किताब ल्याए इद्रीस, पीछे आदम के सौ बरीस ॥४॥

तेहेकीक वह था कहे खलक, एही सांच कहेगा हक । पोहोंचाया चौथे आसमान, बीच मेयराज भिस्त पेहेचान ॥५॥

पैगंमर की दरगाह साबित, रसूल इद्रीस फुरमाए मिले इत ॥६॥

॥ प्रकरण ॥१६॥ चौपाई ॥४२५॥

इसी सन्दर्भ में देखें-