बड़ा कयामतनामा - प्रकरण १८ | Bada Kayamatnama prakaran 18
सिपारा आम आधा पूरन, फजर मक्कीए सूरत रोसन । खास उमत आगे करों बयान, ले रोसनी मारो सैतान ॥१॥
सौगंद खाई बीच होनें फजर, द्वा दोस्तों बखत नजर । फजर बंदगी होसी आराम, जीव दिल पावे इसलाम ॥२॥
पेहेला रोज कौल हुरमत, सो हादी देखावे रोज कयामत । जिस बरस बीच होए फजर, पेहेले जिल्हज थें खुली नजर ॥३॥
ए पेहेले दिन की कही दसमी रात, दसमी सदी बीच आए साख्यात । इन दसमी से अग्यारमी भई प्रभात, मिले दोस्तों सों करी विख्यात ॥४॥
दूसरे सरूप मिल करी कस्त, हाजी मस्कीनों को देखाई वस्त । कह्या अरफे का अगला दिन, वास्ते अग्यारहीं ईद रोसन ॥५॥
पढ़ना द्वा वजीफा जित, सब चाह्या हाजियों का हुआ इत । पाक होवे सबों का दम, तब जाहेर हुई ईद खसम ॥६॥
पेहेला रोज कयामत बयान, सो हजार बरस की इसारत जान ।दोऊ सरूप कहे दो अंगुली, दसमी से दूजी अग्यारहीं मिली ॥७॥
दोऊ मिल अग्यारहीं भई, सब सालें मिलाइयां बीच कही । कलीम अल्ला रोसनी दसमी मिनें, अग्यारमी में ऊग्या दिनें ॥८॥
रात में रोसनी सब जुदी भई, इब्राहीम साल्हे मिल फजर कही । भी फजर कही रोसनी बादल, बरस्या नूर रूहअल्ला सों मिल ॥९॥
बरस्या बादल नूर रोसन, गिरे आंझू सरमिंदे सबन । सब रोवें होवें पसेमान, एही हाल होसी सारी जहान ॥१०॥
॥ प्रकरण ॥१८॥ चौपाई ॥४४३॥
