बड़ा कयामतनामा - प्रकरण १९ | Bada Kayamatnama prakaran 19
साखी- तीन दिन कहे जो बुजरक, सो तीनों सूरतों के दिन । रसूल से कयामत लगे, ए जो किए रोसन ॥१॥
याद करो खुदाए के तांईं, तकबीर कहों दिन गिने हैं जांहीं । ए तीन दिन जो हैं बुजरक, पीछे ईद जुहा के हक ॥२॥
नजीक इमाम आजम के कही, पीछे निमाज सुबह की भई । अरफा से असर ईद दिन, दोए साहेब भए कौल इन ॥३॥
सुबह सेती अरफे का दिन, आखिर तांईं असर इन । बांधी उमेद बड़ी आगूं आवन, भई तीनों दिन निमाज पूरन ॥४॥
इन मसलें साफई इमाम, माफक दूजे साहेब का नाम । सिताबी फिरे जो कोई, तो रोज मिलावा लेवे सोई ॥५॥
अग्यारहीं बारहीं जिल्हज करे, सो गुनाह कछू ना धरे । बाजे हैं जाहिल आरब, बातें करें सिताबी तब ॥६॥
गिरोह एक बखत आखिर, आबिद को खुदाए कह्या यों कर । सिताबी होवे रूखसद, तुझ पर गुनाह नाहीं कद ॥७॥
और कोई ढील करे जो तांहीं, तीन रात रहे मजल माहीं । तिनको कछुए नहीं आजार, तेहेकीक यों ही है निरधार ॥८॥
इन में जो कोई परहेज करे, पीछे अदा के हज गुनाह से डरे । जो कोई खतरों से फिरया होए, परहेज करे आराम वास्ते सोए ॥९॥
बाकी जेती रही उमर, तिन में रखे खुदाए का डर । कयामत को होवें जाहेर, पोहोंचेंगे बदले यों कर ॥१०॥
॥ प्रकरण ॥१९॥ चौपाई ॥४५३॥
