बड़ा कयामतनामा - प्रकरण २० | Bada Kayamatnama prakaran 20
तारीख नामा
जिनको कयामत की है सक, क्यों कर उठसी एह खलक । बात नहीं ए बरकरार, काफर न देखें ए विस्तार ॥१॥
न देखें अपना हवाल, कई पैदा किए आदमी डाल । खुदा खाक पाक से पैदा किया, तिन बूंद का ए विस्तार कर दिया ॥२॥
एही तमाम जो पैदाइस कही, तिनका खुलासा कर देऊं सही । जिन सेती होवे मकसूद, इन नाबूद सेती ल्याया बूद ॥३॥
तिन में बाजे कहे बेसुध, तिनको कबूं न आवे बुध । इन में खुदाए किए दोए, कयामत काम दूजे से होए ॥४॥
साहेब चाहे सो करे, निपट मांहें नजर में धरे । ए खुदाए पेहेले किया करार, जमाना होसी सिरदार ॥५॥
खावंद होए के करसी काम, तिनका अव्वल से धरिया नाम । बाहेर ल्याया तुमारे तांईं, छिपा लड़का था पेट माहीं ॥६॥
निहायत था नातवान, ना वर पाएगी ना काम पेहेचान । सब तरबियत तुमको किया, पोहोंचे कुदरत तमाम हाथ दिया ॥७॥
तूं था बीच कौम जाहिल, तित खुदाए ने दई अकल । बरस बारहीं के लिए तीस, दस लिए अग्यारहीं के किए चालीस ॥८॥
तुममें से कोई होएगा ऐसा, जो पोहोंच के करेगा वफा । बीच ज्वानियां आगूं ज्वान, बाहेर फेर हुए निदान ॥९॥
॥ प्रकरण ॥२०॥ चौपाई ॥४६२॥
