बड़ा कयामतनामा - प्रकरण २४ | Bada Kayamatnama prakaran 24
नौमी आगे अरफा ईद कही, ले दसमी आगे सब लीला भई । मजलें सब अग्यारहीं के मध, सो कहे कुरान विवेक कई विध ॥१॥
ए अग्यारहीं बीच बड़ो विस्तार, प्रगटे बिलंद सब सिरदार । सब न्यामतें सिफतें दई सितार, उतरियां आयतें जो उस्तवार ॥२॥
छिपा था बुजरक बखत, जाहेर हुआ रोज देखाई कयामत । अग्यारहीं सुख ले चले सिरदार, पीछे बारहीं में जले बदकार ॥३॥
जिन पाई राह रोज कयामत, सो उठे फजर के नूर बखत । फजर पीछे जब ऊग्या दिन, तब तो तोबा तोबा हुई तन तन ॥४॥
तब तो दरवाजा मूंद के गया, पीछे तो नफा काहू को न भया । सब जले जल्या अजाजील, जाए उठाया असराफील ॥५॥
एक सूरें उड़ाएके दिए, दूसरे तेरहीं में कायम किए । यों कयामत हुई जाहेर दिन, महंमदें करी उमत रोसन ॥६॥
॥ प्रकरण ॥२४॥ चौपाई ॥५३१॥
प्रकरण तथा चौपाइयों का संपूर्ण संकलन
प्रकरण ५२७, चौपाई १८७५८
॥ बड़ा कयामतनामा सम्पूर्ण ॥
