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श्री बीतक - प्रकरण १ | Beetak prakaran 1

निजनाम श्री जी साहिब जी, अनादि अछरातीत । सो तो अब जाहेर भए, सब विध वतन सहीत ॥

॥ अथ तीनों सरूपों की बीतक लिखते ॥

भविष्य पुराण में, राजा कहे जुग चार । वचन जो हैं व्यास के, ताको करो विचार ॥१॥

सत्रह राजा सतजुग में, एक कहयो राजा कृत्त । तिन अपनी भुगती, तापर भयो कृतदत्त ॥२॥

ता ऊपर अन्त भयो, फेर मुचकुन्दभा होय । ता ऊपर भैरवानन्द, राजा कम्भो कहयो सोय ॥३॥

ता ऊपर आदि भयो, फेर हरनाकुस कहयो नाम । ता ऊपर ताके ठौर, प्रहलाद भयो इस ठाम ॥४॥

ता ऊपर बलिलोचन, तापर बलिभोगत । इनहों अपनी भुगती, लोचनबली इत ॥५॥

ता ऊपर बानासुर, तापर कपिलाक्ष नाम । कपिलभद्र तापर भयो, जरासरी इस ठाम ॥६॥

तापर धूमऋषि कहयो, ए सत्रह सतजुग के । अब कहों त्रेता के, उनतीस नाम भये ॥७॥

प्रथम तो ब्रह्मा भयो, तापर मारीच नाम । तापर कश्यप भयो, फेर सूरज इस ठाम ॥८॥

तापर तवछत्र भयो, तापर अक्षयभा नाम । ता ऊपर अरण्यभा, विश्वामित्र इस ठाम ॥९॥

फेर महामंत्र भयो, तापर भयो चिमन । ता ऊपर राजा भयो, नाम भद्र उदवन ॥१०॥

तापर त्रिसंख भयो, तापर हरिश्चन्द्र होय । तापर रोहितास नाम, मानधाता कहयो सोय ॥११॥

फेर राजा सगर भयो, फेर आसा मित्र नाम । तापर भगीरथ भयो, दिलीप जो इस ठाम ॥१२॥

तापर रघु भयो, फेर अज इस ठाम । तापर भयो दसरथ, फेर रामचन्द्र नाम ॥१३॥

तापर लव भयो, तापर अन्तभान । तापर कयलखी, तापर बबरबान ॥१४॥

ता ऊपर सुदरसन, तापर अग्निवरन । ऐ उनतीस त्रेता मिने, भये राजा ऊपर धरन ॥१५॥

उनैस भये द्वापर में, प्रथम इन्द्र नाम । तापर भयो चन्द्रमा, फेर पूरवा राजा इस ठाम ॥१६॥

अय राजा तापर भयो, निरमोक्ष तापर होय । तापर सान्तनु भयो, चित्र राजा कहयो सोय ॥१७॥

तापर विचित्र भयो, तापर भयो व्यास । ता ऊपर पांडव भयो, फेर अर्जुन राजा आस ॥१८॥

तापर अहिवरन कुमार, फेर सेत्रनख नाम । ता ऊपर संतन भयो, वलीवान इस ठाम ॥१९॥

तापर निरवान भयो, तापर बलीचन्द होय । तापर परीछित भयो, फेर जनमेजय कहयो सोय ॥२०॥

अब कहों बीस कलिजुग के, उन्नीस कहे द्वापर । उनतीस त्रेता के कहे, सत्रह सतजुग पर ॥२१॥

अब कहों कलिजुग के, प्रथम तो जदु नाम । ता ऊपर अजयपाल, फेर महिपाल इस ठाम ॥२२॥

तापर गन्धर्वसेन, वीर विक्रमादित्य । तापर विक्रमाचक्र, फेर भोज कहयो सावित ॥२३॥

तापर गौरी पादसाह, सुलतान अलाउद्दीन नाम । ता-ऊपर नसीरूदीन, लोढ़ा महमूद इस ठाम ॥२४॥

तापर बड़ा महमूद, तापर सूरखां होय । तैमूरलंग तापर भयो, बावर कहयो सोय ॥२५॥

ता ऊपर हुमायुं, ता ऊपर अकबर । ता ऊपर सलीम साह, साहजहां तिन पर ॥२६॥

ता ऊपर औरंगजेब, ए कलियुग के नाम । आगे अवतार होयगा, बुद्ध कलंकी इस ठाम ॥२७॥

श्री महामति कहे ऐ साथ जी, सास्त्र कहें यों कर । आगे अपनी बीतक, सो लीजे चित धर ॥२८॥

(प्रकरण १, चौपाई २८)

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