श्री बीतक - प्रकरण ५६
सिपारे दसमें मिनें, पाने सत्ताईस मिनें बयान । किया मोमिनों मजकूर, सरे के सैतान ॥१॥
मेहेतर था कीनान का, काजी सरे का जेह । रसूल की दावत से, मुनकर हुआ एह ॥२॥
जब मिला मिलावा मोमिनों, रूजू हुई सब जहान । दिन छठा जुमें का, हुई पहिचान ईमाम ॥३॥
बैठे बातां करने, जिनमें जो बीतक । दई साहिदी मोमिनों, गुझ खिलवत जहूर हक ॥४॥
तब काजी हुआ मुनकर, मोसों नहीं मजकूर । रूबरू ए मोमिनों, सब बोलत झूठा जहूर ॥५॥
सबों ने दई लानत, सरे के सैतान । दुनियां में जाहिर भई, इन मारी राह सुभान ॥६॥
तो सरे के सैतान पर, सब को हुई लानत । हमको लेने न दई, हकीकत जो मारफत ॥७॥
महामत कहे ए मोमिनों, ए लिखा बीच फुरमान । मोहर करी दिल आंख पर, और जुबान कान कुफरान ॥८॥
(प्रकरण ५६, चौपाई ३०७०)
