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विषय-सूची

खटरूती - प्रकरण १० | Khatruti prakaran 10

हेमंत रूत (कार्तिक-मगसर) - राग मलार

वाला मारा हेमाले थी हेमरूत हाली, ए तो वेरण आवी रे विरहणियो ऊपर चाली । वृजडी वीटी रे लीधी वचे घाली, पिउजी तमे हजिए कां बेठा आप झाली ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥१॥

रे विरही तमे विरहणियो ने कां न संभारो, नंद कुंअर नेहडो छे जो तमारो । वाला मारा दोष घणो रे अमारो, पिउजी तमे एणी विधे अमने कां मारो ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥२॥

वाला मारा कारत कियो अंगडा कापे, नाहोलिया तारो नेहडो वाले मूने तापे । वाला मूने गुण अंग इंद्रियो रे संतापे, पिउजी विना दुखडा ते सहु मूने आपे ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥३॥

वाला मारा टाढली ते सहुने वाय, हांरे अम विरहणियोने अगिन न माय । ऊपर टाढो वावलियो धमण धमाय, ए रूत मूने सूतडा सूल जगाय ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥४॥

वाला महिनो मागसरियो मदमातो, ते तो अमने मारसे रे जोनी जातो । तारा विरहनी रेहेसे रे वेराट मां वातो, अम ऊपर एम कां नाखी निघातो ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥५॥

रे वाला मारा सियालो सुखणियो मागे, पिउजीना सुख मां सारी रात जागे । वालाजीने विलसे रे वड भागे, अमने तो मंदिरियो मसांण थई लागे ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥६॥

॥ प्रकरण ॥२॥ चौपाई ॥१२॥

इसी सन्दर्भ में देखें-