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विषय-सूची

खटरूती - प्रकरण ११ | Khatruti prakaran 11

सीत रूत - राग मलार

वाला रूतडी आवी रे सीतलडी लूखी, वेलडियो वन जाय रे सर्वे सूकी । वसेके वली वाले रे उतरियो फूकी, पिउजी तमे हजिए कां बेठा अमने मूकी ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥१॥

नाहोलिया निस्वासा धमण धमाय, हांरे मारा अंगडा मां अगिन न माय । वाला तारी झालडियो केमे न झंपाय, पिउजी तारो एवडो स्यो कोप केहेवाय ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥२॥

वाला मारा पोष महिनो रे आव्यो, हांरे अम दुखणियो ने दुख पूरा लाव्यो । वेरीडो अम ऊपर आवीने झंपाव्यो, हांरे मारूं चीरी अंग मीठडे भराव्यो ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥३॥

वाला टाढी अगिननों वावलियो वाय, नीला टली सूकीने भाखरियो थाय । पान फूल फल सर्वे झरी जाय, वाला अमे ए रूत केमे न खमाय ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥४॥

वाला मारा आव्यो रे महिनो माह, जंगलियो वाले रे वनस्पति दाहे । दाहनां दाधां रूखडियो केवा चरमाय, स्याम विना सुंदरियो एम सोहाय ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥५॥

रे वाला मारे मंदिरिए आवी ने आरोग, हांरे अम विरहणियो ना टालो रे विजोग । हां रे सुंदर सेजडीनो आवी लेओ भोग, एता सकल तमारो संजोग ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥६॥

॥ प्रकरण ॥३॥ चौपाई ॥१८॥

इसी सन्दर्भ में देखें-