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विषय-सूची

खटरूती - प्रकरण ९ | Khatruti prakaran 9

अथ बारे मास - सरद रूत - राग मलार

पिउजी तमे सरदनी रूते रे सिधाव्या, हांरे मारा अंगडामां विरह वन वाव्या । ए वन खिण खिण कूपलियो मूके, हां रे मारूं तेम तेम तनडूं सूके ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥१॥

वाला हूं तो पिउ पिउ करी रे पुकारूं, पिउजी विना दोहेला घणां रे गुजारूं । हूं तो दुखडा मांहें ना माहेंज मारूं, हूं तो निस्वासा अंग मां उतारूं ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥२॥

वाला मारा भादरवे ते नदी नाला भरिया, पिउजी निरमल जल रे उछलिया । वाला मारा गिर डूंगर खलखलिया, पिउजी तमे एणे समे हजिए न मलिया ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥३॥

वाला तमे चालता ते चार दिनडा कह्या, हांरे अमे एणी रे आसाए जोईने रह्या । वाला अमे वचन तमारा ग्रह्या, हवे ते अवध ऊपर दिनडा गया ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥४॥

वाला मारा दिनडा आसोना आव्या, हांरे घेर मेघलियो बारे रे सिधाव्या । हांरे वन वेलडिए रंग सोहाव्या, पिउजी तमे एणे समे वृजडी कां न आव्या ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥५॥

वाला मारा एक वार जुओ वनडू आवी, हां रे चांदलिए जोत चढावी । वेलडिए वनस्पति रे सोहावी, एणे समे विरहणियो कां विलखावी ॥ हो स्याम पिउ पिउ करी रे पुकारूं ॥६॥

॥ प्रकरण ॥१॥ चौपाई ॥६॥

इसी सन्दर्भ में देखें-