खुलासा - प्रकरण १८ | Khulasa prakaran 18
अब तुम निकसो नींद से, आए पोहोंची सरत । कौल किया था हक ने, सो आई कयामत ॥१॥
जबराईल हक हुकमें, ल्याया नामें वसीयत । फुरमान फकीरों सफकत, ले आवे दुनी बरकत ॥२॥
द्वार तोबा के बंद होएसी, अग्यारैं सदी आखिर । जो होवे अरवा अर्स की, सो नींद करे क्यों कर ॥३॥
आए लैल के खेल में, लेने अर्स लज्जत । सुख सांचे झूठे दुख में, लेने को एह बखत ॥४॥
आपन बैठे बीच अर्स के, अर्स को नाहीं सुमार । दसों दिस मन दौड़ाइए, काहूं न आवे पार ॥५॥
खसमें ख्वाब देखाइया, बीच अर्स अपने इत । हक हादी रूहें मिलाए के, उड़ाए दई गफलत ॥६॥
ए खेल तो जरा है नहीं, सब है अर्स खसम । बैठे इतहीं जागिए, उठो अर्स में तुम ॥७॥
अर्स बाग हौज जोए के, करो याद हक के सुख । ज्यों पेड़ झूठे ख्वाब का, उड़ जाए सब दुख ॥८॥
असल आराम हिरदे मिने, अर्स को अखंड । तब ए झूठे ख्वाब को, रहे न पिंड ब्रह्मांड ॥९॥
कायम हक के अर्स में, बैठे अपने ठौर । हक के इत वाहेदत में, कोई नाहीं काहूं और ॥१०॥
महामत कहे ए मोमिनों, इस्क लीजे हक । असल अर्स के बीच में, हक का नाम आसिक ॥११॥
॥ प्रकरण ॥१८॥ चौपाई ॥१०२०॥
किताब कुरान की, इनमें एते बाब हैं - खुलासा फुरमान का, गिरो दीन का, मेयराजनामे का, खुलासा इसलाम का, भिस्त सिफायत का बेवरा, हक की सूरत का, नाजी फिरके का, रूहों की बिने, नूर-नूरतजल्ला, जहूरनामा, दोनामा, मीजान अर्स अजीम की महाकारन, मोमिन आए अर्स अजीम से, दोनामा के प्रकरण पांच किताब तमाम ।
चौपाइयों तथा प्रकरणों का संपूर्ण संकलन
प्रकरण ३६५, चौपाई ९४८२
॥ खुलासा सम्पूर्ण ॥
