खुलासा - प्रकरण ६ | Khulasa prakaran 6
इलम का बेवरा नाजी फिरका
फुरमाया कहूं फुरमान का, और हदीसे महंमद । मोमिन होसी सो चीन्हसी, असल अर्स सब्द ॥१॥
एक कहया वेद कतेब ने, जो जुदा रहया सबन । तिनको सारों ढूंढ़िया, सो एक न पाया किन ॥२॥
एक बका सब कोई कहे, पर कोई कहे न बका ठौर । सब कहें हमों न पाइया, कर कर थके दौर ॥३॥
सब किताबों में लिख्या, एक थें भए अनेक । सो सुकन कोई न केहेवहीं, जो इस तरफ है एक ॥४॥
सो हक किनों न पाइया, जो कहया एक हजरत । ढूंढ़ ढूंढ़ फिरके फिरे, पर किनहूं न पाया कित ॥५॥
ना कछू पाया एक को, ना उमत अर्स ठौर । ना पाया हौज जोए को, जाए लगे बातों और ॥६॥
नब्बे बरस हजार पर, पढ़ते गुजरे दिन । लिखी कयामत बीच कुरान के, सो तो न पाई किन ॥७॥
आसमान जिमी की दुनियां, कथे इलम करे कसब । किन एक न बका पाइया, दौड़ दौड़ थके सब ॥८॥
यों गोते खाए बीच फना के, ला सुन्य ना उलंघी किन । ढूंढ़ ढूंढ़ सबे थके, कोई पोहोंच्या न बका वतन ॥९॥
लदुन्नी से पाइए, जो है इलम खुदाए । खोज खोज सबे हारे, आज लों इप्तदाए ॥१०॥
लिख्या है कतेब में, सोई करूं मजकूर । एक फिरका पावेगा, जिन को तौहीद जहूर ॥११॥
लिख्या है फुरमान में, खुदा एक महंमद बरहक । तिनको काफर जानियो, जो इनमें ल्यावे सक ॥१२॥
एक खुदा हक महंमद, अर्स बका हौज जोए । उतरी अरवाहें अर्स की, चीन्हो गिरो नाजी सोए ॥१३॥
सब दुनियां का इलम, लिख्या कुरान में ए । सो कोई इलम पोहोंचे नहीं, बनी असराईल मूसा के ॥१४॥
कहे फुरमान इलम मूसे का, और बड़ा इलम खिजर । इलम खुदाई बूंद के, न आवे बराबर ॥१५॥
फिरके इकहत्तर मूसा के, हुए ईसा के बहत्तर । एक को हिदायत हक की, यों कहया पैगंमर ॥१६॥
महंमद के तेहत्तर हुए, तिनको हुआ हुकम । जिन को हिदायत हक की, तामें आओ तुम ॥१७॥
जिन दीन लिया खुदाए का, सो नाजी गिरो आखिर । और होसी दोजखी, जो जुदे रहे बहत्तर ॥१८॥
दुनियां चौदे तबक में, सोई नाजी गिरो है एक । आखिर जाहेर होएसी, पर पेहेले लेसी सोई नेक ॥१९॥
महामत कहे ए मोमिनों, ल्यो हकीकत कुरान । ढूंढ़ो फिरके नाजी को, जो है साहेब ईमान ॥२०॥
॥ प्रकरण ॥६॥ चौपाई ॥४०७॥
