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किरन्तन - प्रकरण १ | Kirantan prakaran 1

राग श्री मारू

पेहेले आप पेहेचानो रे साधो, पेहेले आप पेहेचानो । बिना आप चीन्हें पारब्रह्म को, कौन कहे मैं जानो ॥१॥

पीछे ढूंढ़ो घर आपनों, कौन ठौर ठेहेरानो । जब लग घर पावत नहीं अपनों, सो भटकत फिरत भरमानो ॥२॥

पांच तत्व मिल मोहोल रच्यो है, सो अंत्रीख क्यों अटकानो । याके आस पास अटकाव नहीं, तुम जाग के संसे भानो ॥३॥

नींद उड़ाए जब चीन्होंगे आपको, तब जानोगे मोहोल यों रचानो । तब आपै घर पाओगे अपनों, देखोगे अलख लखानो ॥४॥

बोले चाले पर कोई न पेहेचाने, परखत नहीं परखानों । महामत कहे माहें पार खोजोगे, तब जाए आप ओलखानो ॥५॥

॥ प्रकरण ॥१॥ चौपाई ॥५॥

इसी सन्दर्भ में देखें-