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विषय-सूची

किरन्तन - प्रकरण ११२

राग सिंधुड़ा

सरूप सुन्दर सनकूल सकोमल, रूह देख नैना खोल नूर जमाल । फेर फेर मेहेबूब आवत हिरदे, किया किनने तेरा कौल फैल ए हाल ॥१॥

जामा जड़ाव जुड़या अंग जुगतें, चार हारों करी अंबर झलकार । जगमगे पाग ए जोत जवेर ज्यों, मीठे मुख नैनों पर जाऊं बलिहार ॥२॥

लाल अधुर हँसत मुख हरवटी, नासिका तिलक निलवट भौंहें केस । श्रवन भूखन मुख दंत मीठी रसना, ए देख दरसन आवे जोस आवेस ॥३॥

बांहें चूड़ी बाजू बंध सोहे फुमक, पोहोंची कांड़ों कड़ी हस्त कमल मुंदरी । नख का नूर चीर चढ़या आसमान में, ज्यों हक चलवन करें सब अंगुरी ॥४॥

रोसनी पटुके करी अवकास में, चरन भूखन जामें इजार झांई । कहें महामती मोमिन रूह दिल को, मासूक खैंचें तोहे अर्स मांहीं ॥५॥

॥ प्रकरण ॥११२॥ चौपाई ॥१६८०॥

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