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किरन्तन - प्रकरण ११४ | Kirantan prakaran 114

नूर को रूप सरूप अनूप है, नूर नैना निलवट नासिका नूर । नूर श्रवन गाल लाल नूर झलकत, नूर मुख हरवटी नूर अधूर ॥१॥

नूर मुख चौक मांडनी अति नूर में, नूर वस्तर नूर भूखन जहूर । नूर जोवन रोसन नूर नौतन, नूर सब अंगो उद्दोत नूर पूर ॥२॥

नूर चरन कमल नूर हस्तक, नूर सोभा सबे नूर सिनगार । नूर सिर पाग नूर कलंगी दुगदुगी, नूर हिये हार नूर गंज अंबार ॥३॥

नूर हक सहूर मजकूर नूर महामत, नूर ऊग्या बका नूर का सूर । सब नूर रूहें नूर हादी नूर में, नूर नूर में खैंच लई हकें हजूर ॥४॥

॥ प्रकरण ॥११४॥ चौपाई ॥१६८८॥

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