किरन्तन - प्रकरण ११९ | Kirantan prakaran 119
राग श्री परज
वारी रे वारी मेरे प्यारे, वारी रे वारी । टूक टूक कर डारों या तन, ऊपर कुंज बिहारी ॥१॥
सुन्दर सरूप स्याम स्यामा जी को, फेर फेर जाऊं बलिहारी । इन दोऊ सरूपों दया करी, मुझ पर नजर तुमारी ॥२॥
इन जेहेर जिमी से कोई ना निकस्या, अमल चढ़यो अति भारी । मुझ देखते सैयल मेरी, कैयों जीत के बाजी हारी ॥३॥
कारी कुमत कूब कुचल, ऐसी कठिन कठोर हूं नारी । आतम मेरी निरमल करके, सेहेजें पार उतारी ॥४॥
सुन्दर सरूप सुभग अति उत्तम, मुझ पर कृपा तुमारी । कोट बेर ललिता कुरबानी, मेरे धनी जी कायम सुखकारी ॥५॥
॥ प्रकरण ॥११९॥ चौपाई ॥१७२४॥
