किरन्तन - प्रकरण १२२
ब्रह्मसृष्टि बीच धाम के, ए देखें खेल सुपन । मोहे स्यामाजीएँ यो कहया, जो आए धाम से आपन ॥१॥
थे हम दोऊ बंदे स्यामाजीय के, एक नसली और नजरी । झगड़ दोऊ जुदे हुए, देने खबर पैगंमरी ॥२॥
तब केतिक गिरो उधर भई, और केतिक मेरे साथ । दई जाहेर मसनंद नसलिएँ, दूजी बातून मेरे हाथ ॥३॥
उतरी किताबें हम पे, गिरो नसली न माने सोए । तब आया पैगंमर हममें, अब कहया महंमद का होए ॥४॥
सो हकीकत सब कुरान में, कई ठौरों लिखी साख । जो ग्वाही लिखी आप साहेबें, कहूं केती हजारों लाख ॥५॥
हम दोऊ बंदे रूहअल्लाह के, दोऊ गिरो जुदी भई । तीसरी सृष्ट जो जाहेरी, सब मजकूर इनकी कही ॥६॥
ठौर ठौर दई बड़ाइयां, मिने सब हमारी बात । केती कहूं मेहेरबानगी, मेरे धनी करी साख्यात ॥७॥
महामत कहें कोई दिल दे, ए देखेगा मजकूर । तिन रूह पर इमाम का, बरसे वतनी नूर ॥८॥
॥ प्रकरण ॥१२२॥ चौपाई ॥१७५८॥
