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किरन्तन - प्रकरण ५०

बाई रे गेहेलो वालो गेहेली वात करे रे, एहने कोई तमें वारो । दुरजन देखतां अमने बोलावे, निलज ने धुतारो ॥१॥

नित उठी आंगनडे ऊभो, आलज करे अमारी । लोक मांहें अमें लज्या पामूं, हूं कुलवधुआ नारी ॥२॥

नासंती क्यांहें न छूटूं ए थी, आड़ज बांधे आवी । हूं जांणूं रखे सासुडी सांभले, थाकी कही केहेवरावी ॥३॥

वारतां वलगतां वाले, जोरे सांईड़ा लीधां । कहे महामती सुणो रे सखियो, वाले एणी पेरे गेहेलडा कीधां ॥४॥

॥ प्रकरण ॥५०॥ चौपाई ॥५१६॥

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