Kuljam.org

विषय-सूची

किरन्तन - प्रकरण ६१ | Kirantan prakaran 61

राग श्री नट

साहेब तेरी साहेबी भारी । कौन उठावे तुझ बिन तेरी, सो दई मेरे सिर सारी ॥१॥

त्रिगुन तिर्थंकर अवतार, कई फरिस्ते पैगंमर । तिन सबकी सोभा ले स्याम, आया महंमद पर ॥२॥

नूर नामे में पैगंमर, एक लाख बीस हजार । सो सिफत सब महंमद की, सो महंमद स्याम सिरदार ॥३॥

सो महंमद कासिद होए के, ले आया फुरमान । वास्ते हमारे हम में, पोहोंचाय हैं निसान ॥४॥

रूह अल्ला किल्ली अल्लाह थें, ले उतरे चौथे आसमान । सो हम मांहें बैठ के, खोले कुलफ कुरान ॥५॥

सो फुरमान आप खोल के, करी जाहेर हकीकत । खोले वेद कतेब के गुझ, आई सबों की सरत ॥६॥

कलीम अल्ला कह्या मूसे को, फुरमाया सब कहे । सो कलाम अल्ला की रोसनी, ताबे हादी के रहे ॥७॥

खलील अल्ला दोस्त खुदाए का, जाकी पोहोंची दुआ हजूर । सो भी रहत इमाम में, कलाम अल्ला का जहूर ॥८॥

अली वली सेर दरगाह का, जो दरगाह बड़ी खुदाए । अवल सें किन पाई नहीं, सो आखिर प्रगटी आए ॥९॥

नूह नबी को वारसी, आदम दई पोहोंचाए । आए ईसा नूह नबी इमाम, सो आदम सफी अल्लाह ॥१०॥

असराफील ले उतरया, जागृत बुध नूर । सो बैठ बजाए इमाम में, मगज मुसाफी सूर ॥११॥

जबराईल जोस धनी का, सो आया गिरो जित । करे वकीली उमत की, कहूं पैठ न सके कुमत ॥१२॥

औलिए अंबिए गोस कुतब, सब आए बीच उमत । रूहें पैगंमर फरिस्ते, सब मिले आखिरत ॥१३॥

बनी असराईल जिकरिया, एहिया यूसफ इस्माईल । बखत बदल्या दाऊद आए, हुए जाहेर नूर जमाल ॥१४॥

इसहाक एलिया इद्रीस, आए बोहोना सलेमान । मुलक हुआ नबियन का, मार दिया सैतान ॥१५॥

कई किताबें कई कलमें, कई जो नामें और । जो कोई कहावे बुजरक, सब आए मिले इन ठौर ॥१६॥

दई बड़ी बड़ाई आपसी, दियो सो अपनों नाम । करनी अपनी दे थापी, दे साहेदी अल्ला कलाम ॥१७॥

मोहे अपनों सब दियो, रही न कोई सक । सही नाम दियो मोहोर अपनी, कर रोसन थापी हक ॥१८॥

खुदा काजी होय के, कजा करसी सबन । सो हिसाब जरे जरे को, लियो चौदे भवन ॥१९॥

त्रैलोकी तिमर नसाइयो, कर रोसन अति जहूर । चौदे लोक चारों तरफों, बरस्या खुदा का नूर ॥२०॥

भई सोभा संसार में, अति बड़ी खूबी अपार । दुनियां उठाई पाक कर, ना जरा रह्या विकार ॥२१॥

पेहेले प्रले करके, उठाए लिए ततखिन । मेरे हाथ कराए के, दई सोभा चौदे भवन ॥२२॥

काटे करम सबन के, काल मार किया दुख दूर । हिरदे मांहें नूर के, लिए नजर तले हजूर ॥२३॥

रोसनी पार के पार की, दई साहेब नाम धराए । भई दुनियां साफ मुसाफ से, मुझसे कजा कराए ॥२४॥

नूर अछर की नजरों, कई कोट ऐसे इंड । त्रिगुन त्रैलोकी पल में, कई उपज फना ब्रह्मांड ॥२०॥

सो नूर सरूप आवें नित, नूर तजल्ला के दीदार । आस पुराई इन की, मेरे ऐसे इन आकार ॥२६॥

ऐसी बड़ाई कई सिर मेरे, दे दे लई जो दाब । सब दुनियां के दिल में आनी, दे साहेदी सब किताब ॥२७॥

॥ प्रकरण ॥६१॥ चौपाई ॥७१८॥

इसी सन्दर्भ में देखें-