किरन्तन - प्रकरण ७२
जंजीरां मुसाफ की, मोतियों में परोइए जब । जिनसें जिनस मिलाइए, पाइए मगज माएने तब ॥१॥
देऊं हरफ हरफ की आयतें, जो हादिऐं खोले द्वार । सब सिफत खास गिरोह की, लिखी बिध बिध बेसुमार ॥२॥
कलाम अल्ला की इसारतें, खोल दैयां खसम । महामत पर मेहेर मेहेबूबें, करी ईसे के इलम ॥३॥
ब्रह्मसृष्ट वेद पुरान में, कही सो ब्रह्म समान । कई बिध की बुजरकियां, देखो साहेदी कुरान ॥४॥
कहे छत्ता मगज मुसाफ के, जिनस जंजीरां जोर । सब सिफत खास गिरोह की, ए समझें एही मरोर ॥५॥
॥ प्रकरण ॥७२॥ चौपाई ॥९१३॥
