Kuljam.org

विषय-सूची

मारफत सागर - प्रकरण १० | Maarfat Saagar prakaran 10

सूरज मगरब का निसान

कह्या मगरब ऊगसी सूरज, दुनियां के दिल पर । नाहीं रोसनी तिनमें, तब होसी बखत आखिर ॥१॥

सूरज ऊग्या मगरब दिलों, कह्या रोसन नाहीं तित । तो अक्स सूरज की अंधेरी, सो गया ईमान रही जुलमत ॥२॥

रोसन बिना सूरज कह्या, ऊग्या दिलों पर जे । सो आई पुकार मगरब से, देखो निसान जाहेर हुए ए ॥३॥

ए कह्या रसूलें इसारतों, ऐसा होसी बखत आखिर । मता ले जासी जबराईल, तब रेहेसी अंधेर दिलों पर ॥४॥

कह्या सूरज होसी मगरब का, तिनमें नहीं रोसन । होसी गुलबा जोर दज्जालका, तब ईमान न रेहेसी किन ॥५॥

जाहेरी देखें सूरज जाहेर, अजूं मगरब ऊग्या नाहें । देखें न माएना अंदर, कह्या रोसन नहीं तिन मांहें ॥६॥

तब सूरज पना क्या रह्या, कही बिन रोसन अंधेर । सो गया ईमान रह्या कुफर, तिन लई जो दुनियां घेर ॥७॥

॥ प्रकरण ॥१०॥ चौपाई ॥५५२॥

इसी सन्दर्भ में देखें-