Kuljam.org

विषय-सूची

मारफत सागर - प्रकरण ७ | Maarfat Saagar prakaran 7

बाब फितने का

मांगी रसूलें रेहेमत, जिमी स्याम इमन । तब अर्ज करी आरबों, नबी दिया न जवाब तिन ॥१॥

फेर मांगी रसूलें रेहेमत, जिमी स्याम इमन को । तब फेर अर्ज करी आरबों, क्या है बरारबमों ॥२॥

तब फुरमाया रसूल ने, है फितना सोर तुम मांहें । स्याम इमन जिमी बचोगे, और खैर काहूं नाहें ॥३॥

सोए देखोगे जाहेर, मेरे पीछे बीच करन । सोई पातसाही यारों की, होसी फितना बीच खलीफन ॥४॥

रसूल खड़े टेकरी पर, कह्या देखत यारों तुम । कह्या हक जानें या रसूल, जानत नाहीं हम ॥५॥

तब कह्या रसूलें हदीस में, ए जो सैतान का फितना । सो आवत बीच बरारब, मैं देखत हों इतना ॥६॥

आवेगा बरसात ज्यों, छोड़े ना कोई घर । मैं केहेता हों तुम देखियो, ऐसा होसी मुझ बिगर ॥७॥

कह्या मेरी उमत में, उठेगी तरवार । सो रेहेसी लग आखिर, ऐसा होसी बखत ख्वार ॥८॥

और कह्या बीच हदीस के, मेरे पीछे होसी इमाम । मैं डरता हों तिन से, गुम करसी गिरो तमाम ॥९॥

दुनियाँ भी ऐसी होएसी, दिल अबलीस सैतान । वजूद होसी आदमी, दिल कहूं न पाइए ईमान ॥१०॥

नाम मेरा चलावसी, कहेंगे तरीका महंमद । सुंनत जमात कौल तोड़ के, जुदे पड़सी कर जिद ॥११॥

केहेसी हम सुंनत जमात हैं, राह छोड़सी बीच की असल । मेरा तरीका छोड़ के, चलसी अपनी अकल ॥१२॥

जब हुए हिजाबमें रसूल, तबहीं खतरा पड़या बीच यार । तबहीं आया बीच फितना, पड़ी जुदागी बीच चार ॥१३॥

सफर बखत रसूल के, तीन हुए न खबरदार । बखत गए आए खड़े, लगे करने और विचार ॥१४॥

अली आए खड़ा कबर पर, काढ़ के जुल्फिकार । कह्या न छोड़ोंगा किनको, आइयो होए हुसियार ॥१५॥

तब चारों अपने हुए, हुआ फितना बीच जोर । सफर पीछे रसूल के, दिन दिन बाढ़या सोर ॥१६॥

अब देखो दिल विचार के, कैसा बीच पड़या इनमें । ऐसी दुनी दोस्ती भी न करे, जैसी हुई जमात से ॥१७॥

तीन यारों के जुदे हुए, करके बीच करार । हमहीं सुंनत जमात हैं, खासी उमत खासे यार ॥१८॥

इतथें अली के जुदे हुए, बैठ फितने किया पसार । कई हुइयां लड़ाइयां जमातसे, कई कतल किए तरवार ॥१९॥

लेने को बुजरकियां, जमात मारी समसेर । मारे मराए यार अस्हाबों, ऐसा फितने किया अंधेर ॥२०॥

कोई न छोड़या घर आरब, बीच फितना हुआ सबमें । कह्या हदीसों सोई हुआ, सबुर न किया किननें ॥२१॥

ए सब फुरमाया हुआ, देखो आयतों हदीसों विचार । सो आए सदी लग आखिरी, आई किबले से पुकार ॥२२॥

ए नीके दिल विचारियो, माएना हदीसों आखिरत । फसल आई अर्सों भिस्तों की, हुआ दिन हक बका मारफत ॥२३॥

महामत कहे ए मोमिनों, कही फितने की हकीकत । अब कहूं सातों निसान, जिन पर मुद्दा कयामत ॥२४॥

॥ प्रकरण ॥७॥ चौपाई ॥५०१॥

इसी सन्दर्भ में देखें-