परिकरमा - प्रकरण ३५
नूर परिकरमा अंदर दस भोम - मंगला चरन
बड़ीरूह रूहें नूर में, लें अर्स नूर आराम । नूरजमाल के नूर में, नूर मगन आठों जाम ॥१॥
तिनका जरा सब नूर में, नूर जिमी बिरिख बाग । नूर फल फूल पात नूर, रूहें निसदिन नूर सोहाग ॥२॥
नूर किनार नूर जोए के, नूर जल तरंग । नूर जल पर मोहोलातें, क्यों कहूं नूर के रंग ॥३॥
नूर जिमी निकुंज बन, नूर जिमी जल ताल । नूर टापू मोहोलात नूर, और नूर मोहोल बन पाल ॥४॥
नूर जल किनारे सीढ़ियां, नूर चबूतरा गिरदवाए । नूर मोहोल मेहेराव फिरते, नूर झांई जल में बनराए ॥५॥
नूर जरे तिनके का, मैं नूर कह्या दिल धर । नूर समूह की क्यों कहूं, रूहें नूर देखें सहूर कर ॥६॥
सुपेत जिमी नूर झलके, नूर आकास लग भरपूर । नूर सामी आकास का, क्यों कहूं जोर जंग नूर ॥७॥
नूर बाग हिंडोले रोसन, बिना हिसाबें नूर के । हक हादी रूहें नूर में, नूर हींचें अर्स लगते ॥८॥
हक बड़ी रूह हींचें नूर में, और रूहें नूर बारे हजार । जोत नूर आकास में, नूर भरयो करे झलकार ॥९॥
खोल आंखें रूह नूर की, क्यों नूर न देखे बेर बेर । क्यों न आवे बीच नूर के, ज्यों नूर लेवे तोहे घेर ॥१०॥
ए रोसन करत कौन नूर की, नूर केहेत आगे किन । केहेत है नूर किनका, नूर रूह केहे चली मोमिन ॥११॥
देखो मोहोलातें नूर की, अंदर सब पूर नूर । कहां लग कहूं माहें नूर की, नूर के नूर जहूर ॥१२॥
सब चीजें इत नूर की, बिना नूर कछुए नाहें । नूर माहें अंदर बाहेर, सब नूर नूर के माहें ॥१३॥
नूर नजरों नूर श्रवनों, नूर को नूर विचार । नूर सेज्या सुख नूर अंग, नूर रोसन नूर सिनगार ॥१४॥
नूर खाना नूर पीवना, नूर मुख मजकूर । इस्क अंग सब नूर के, सब नूर पूर नूर ॥१५॥
गुन अंग सब नूर के, नूर इंद्री नूर पख । रीत रसम सब नूर की, प्रीत प्रेम नूर लख ॥१६॥
आसमान जिमी तारे नूर के, नूर चांद और सूर । रंग रूत नूर वाए बादल, गाजे बीज नूर भरपूर ॥१७॥
मोहोल मन्दिर सब नूर में, झांखन झरोखे नूर । द्वार दिवालें नूर सब, सब नूर हजूर या दूर ॥१८॥
थंभ दिवालें नूर की, नूरै के झरोखे । नूर सरूप माहें झांकत, नूर सब नूर देखें ए ॥१९॥
मोहोल मन्दिर सब नूर के, नूर मेहेराव खिड़कियां द्वार । नूर सीढ़ियां सोभा नूर की, बीच गिरदवाए नूर झलकार ॥२०॥
कहा कहूं नूर नवे भोम का, नूर क्यों कहूं नूर बिसात । नूर वस्तर कहे न जावहीं, तो क्यों कहूं नूर हक जात ॥२१॥
रहें नूर सरूप पानी मिने, तो भीजें ना नूर तन । नूर तन रहें जो आग में, तो भी नूर न जलें अगिन ॥२२॥
कहे हक नूर बैठ नासूत में, करें नूर लाहूत के काम । नूर रूहें जिमी दुख में, लेवें नूर लाहूती आराम ॥२३॥
दिल मोमिन अर्स नूर में, नूर इस्क आग जलाए । एक नूर वाहेदत बिना, और नूर आग काहूं न बचाए ॥२४॥
कई गलियां नूर पौरियां, कई नूर चौक चौबट । नूर बसे जो इन दिलों, तो नूर खुल जावे पट ॥२५॥
नूर सीढ़ियां नूर चबूतरे, नूरै के थंभ दिवाल । बीच खाली सोभा नूर की, ए नूर कहूं किन हाल ॥२६॥
बाजे बासन सब नूर के, पलंग चौकी सब नूर । नूर बिना जरा नहीं, नूर नूर में नूर जहूर ॥२७॥
दसों दिसा सब नूर की, नूरै का आकास । इन जुबां नूर बिलंद की, क्यों कहूं नूर प्रकास ॥२८॥
बाग जंगल राह नूर के, पसु पंखी नूर पूर । ख्वाब जिमी में नूर अर्स की, नूर जुबां कहा करे मजकूर ॥२९॥
होत नूर थें दूजा बोलते, दूजा नूर बिना कछू नाहें । एक वाहेदत नूर है, सब हक नूर के माहें ॥३०॥
नूर कहे महामत रूहें, देखो नजरों नूर इलम । वाहेदत आप नूर होए के, पकड़ो नूरजमाल कदम ॥३१॥
॥ प्रकरण ॥३५॥ चौपाई ॥१९८७॥
