परिकरमा - प्रकरण ३६
नूर परिकरमा अन्दर तांई
नूर तरफ पाट घाट नूर का, बारे थंभ नूर के । ऊपर चांदनी नूर रोसन, नूर क्यों कहूं किनार बन ए ॥१॥
नूर घाट जांबू बन का, और नूर घाट नारंग । बट घाट छत्री बन हिंडोले, पुल सोभे मोहोल नूर रंग ॥२॥
नूर किनारे रेती नूर में, मोहोल चबूतरे नूर किनार । ताल हिंडोले बीच नूर बन, नूर सोभा निकुंज अपार ॥३॥
नूर नेहेरें मोहोलों तले, नूर ढांपे चले अनेक । नूर चले नूर चक्राव ज्यों, नूर सुख पाइए देख विवेक ॥४॥
मोहोल मानिक पहाड़ नूर के, कई नेहेरें चादरें नूर ताल । कई मोहोल हिंडोले नूर के, ए नूर देखे बदले हाल ॥५॥
कहा कहूं हिंडोले नूर के, नूर रूहें झूलें बारे हजार । इन बिध नूर हिंडोले, नाहीं न नूर सुमार ॥६॥
बन नूर नेहेरें ढांपी चली, कई नेहेरें बन नूर विस्तार । कई नूर नेहेरें मिली सागरों, कई नूर नेहेरें आवें वार ॥७॥
कई मोहोलातें इत नूर की, कई टापू नूर मोहोलात । ए निपट बड़े मोहोल नूर के, मोहोल नूर आकास में न समात ॥८॥
नूर परिकरमा दीजिए, फिरते जाइए नूर बन में । बाग परे नूर अंन बन, आगूं बन बिना नूर जिमी ए ॥९॥
दूब दुलीचे नूर में, नूर लग्या जाए आसमान । दूर लग नूर या विध, नूर खेलें इत चौगान ॥१०॥
आगूं बड़ा बन नूर का, आए नूर मधुबन । कई हिंडोले नूर के, हुआ आसमान नूर रोसन ॥११॥
नूर पांच पेड़ पुखराज के, दो नूर सीढ़ी तीसरा ताल । ए आठों पहाड़ तले नूर में, ऊपर नूर मोहोल ना मिसाल ॥१२॥
हजार गुरज नूर चांदनी, चांदनी नूर आसमान । तापर मोहोल नूर आकासी, ए नूर आकास मोहोल सुभान ॥१३॥
इत बड़े जानवर नूर में, नूर खेलत रूहें खुसाल । इत निपट बड़ा खेल नूर का, हँसे रूहें हादी नूरजमाल ॥१४॥
चारों तरफ मोहोल नूर ताल के, नूर जल चादरों गिरत । सो परत बीच नूर कुंड के, रूहें देख देख नूर हंसत ॥१५॥
तले बंगले नेहेरें नूर की, चले चक्राव नूर इत । चारों तरफ बड़ी नूर पौरी, नूर सोभा न देखी कित ॥१६॥
इत बंगले बगीचे नूर के, नूर कारंजें कई उछलत । खूब खुसाली नूर भरी, नूर हँसें खेलें रमत ॥१७॥
नूर बाहेर नेहेर आई कुंड में, आगूं नूर चबूतरे । जाए ढांपी चली मोहोल नूर के, नेहेर खुली नूर किनारे ॥१८॥
दोऊ ढांपे किनारे नूर के, जोए फिरी नूर तरफ ताल । नूर एक मोहोल एक चबूतरा, ए नूर देख होइए खुसाल ॥१९॥
बड़ा बन मोहोल नूर का, ए नूर अति सोभित । जोए नूर आई पुल तले, सो क्यों कही जाए नूर सिफत ॥२०॥
ए मोहोल नूरजमाल के, दोए नूर पुल जोए ऊपर । नूर नेहेरें दस घड़नाले, ए खूबी नूर जुबां कहे क्यों कर ॥२१॥
केल घाट नूर कतरे, चौकी सोभित नूर किनार । पोहोंची नूर पुल बराबर, आगूं लिबोई नूर अनार ॥२२॥
ए नूर चौकी भोम चार की, नूर पुल से आए तीन घाट । अति सोभा आगूं छत्री नूर की, ऊपर जल नूर पाट ॥२३॥
नूर मानिक हीरे पाच पोखरे, नूर द्वार से आए फेर द्वार । चारों खूंटों नूर थंभ नीलवी, नूर पाच रंग बारे सुमार ॥२४॥
नूर नेहेरें तीन तले चलें, नूर पाट एता जल पर । ठौर खेलन नूर जमाल के, ए नूर रूहें देखें दिल धर ॥२५॥
दोऊ पुल नूर सात घाट में, रूहें देखें नूर रोसन । हक जिकर नूर पंखियों, होत नूर में रात दिन ॥२६॥
नूर भोम दूजी बैठक, पसु पंखियों एह नूर ठौर । कई जिनसें नूर जिकर, बिना हक न बोले नूर और ॥२७॥
आगूं द्वार नूर चांदनी, रेती रोसन नूर आसमान । नूर जंग होत सबों बीचों, कोई सके न नूर काहूं भान ॥२८॥
आगूं दोए नूर चबूतरे, दोऊ पर नूर दरखत । लाल हरे रंग नूर के, ए नूर जानें हक सिफत ॥२९॥
नूर आगूं दरबार के, नूर लग चांदनी झलकार । हांस पचासों नूर पूरन, नूर जोत न कहूं सुमार ॥३०॥
नूर सामी नूर द्वार का, होत नूर नूर सों जंग । खड़ियां आगूं नूर चांदनी, नूर देखें अर्स नूर अंग ॥३१॥
नूर हीरे मानिक पोखरे, पाच नीलवी नूर थंभ । नूर पांच रंग दोऊ तरफों, दस दिवालें नूर अचंभ ॥३२॥
अंदर आओ नूर द्वार के, फेर देख नूर अर्स । नूर मंदिर चौक चबूतरे, नूर एक पे और सरस ॥३३॥
नूरै के मोहोल मन्दिर, नूर दिवालें द्वार । नूर नकस कटाव नूर, नूर क्यों कहूं बड़ो विस्तार ॥३४॥
चलो नूर द्वार से नूर ले, दे नूर तवाफ गिरदवाए । देख मेहेराव नूर झरोखे, नूर बाग देख फेर आए ॥३५॥
नूर चेहेबच्चे नूर चबूतरे, ए नूर फेर फेर देख । फेर नूर चौक द्वारने, नूरै नूर विसेख ॥३६॥
दो दो मन्दिर हारें नूर की, बीच दो दो नूर थंभ हार । यों नवे भोम नूर मन्दिर, नूर झरोखे किनार ॥३७॥
यों सब भोमें नूर गिरदवाए, थंभ गलियां नूर मन्दिर । मेहेराव झरोखे नूर के, देख नूर लगता इनों अन्दर ॥३८॥
इन अन्दर नूर हवेलियां, नूर मोहोल फिरते लग तिन । साम सामी मोहोल नूर के, दो दो चौक आगूं नूर इन ॥३९॥
इन अन्दर हवेलियां नूर की, नूर हवेलियों दोए हार । नूर चौक बीच तिन हारों, नूर चौक आगूं दोए द्वार ॥४०॥
ए जो फिरती नूर हवेलियां, नूर लग लग बराबर । आगूं नूर द्वार चबूतरे, नूर सिफत अति सुन्दर ॥४१॥
आए फिरते नूर द्वार लग, सोभा फिरती नूर लेत । नूर द्वार सामी नूर द्वारने, सामी हवेली नूर सोभा देत ॥४२॥
द्वार द्वार नूर मुकाबिल, नूर चबूतरों चबूतरे । नूर मोहोल मोहोल मुकाबिल, दोऊ तरफों सोभा नूर ए ॥४३॥
दोऊ मोहोलों बीच नूर गली, नूर चबूतरे चौक चार । नूर गली आई बीच में, दोऊ साम सामी नूर द्वार ॥४४॥
जेते फिरते नूर द्वार ने, आगूं नूर चबूतरे दोए दोए । नूर चौक चारों चबूतरों, दोऊ नूर द्वार बीच सोए ॥४५॥
नूर चौक ऐसे ही गिरदवाए, नूर फिरते आए सब में । बीच फिरती आई नूर गली, नूर गली सोभा पौरी ए ॥४६॥
एक पौरी चौरे नूर से, आइए और चौरे नूर किनार । दोऊ चौरे नूर गली पर, नूर बनी पौरी चार ॥४७॥
चार थंभ नूर हर चौरे, चार पौरी आगूं नूर द्वार । नूर पौरी चार हर चौरे, ए नूर सोभा ना किन सुमार ॥४८॥
हर दोऊ द्वार आगूं नूर चौक, नूर चौकों चार चबूतर । हर चौकों नूर पौरी चौबीस, यों चौक बने नूर भर ॥४९॥
दो हार नूर थंभन की, नूर गली चली गिरदवाए । बीच नूर गली कई पौरियां, ए नूर सोभा क्यों कही जाए ॥५०॥
आड़ी आवत नूर गलियां, नूर चौक होत तिन से । नूर गली दोए दाएँ बाएँ, गली चली नूर हवेलियों में ॥५१॥
इन विध नूर गलियां, बीच नूर हवेलियों निकसत । ए नूर गली दोऊ तरफों, आखिर नूर मोहोलों पोहोंचत ॥५२॥
याही विध नूर गिरदवाए, चौक हुए नूर गलियों के । नूर तवाफ दे देखिए, यों चौक गली सोभे नूर ए ॥५३॥
यों नूर फिरती चार मोहोलातें, ए नूर खूबी अतंत । ए हुकम कहावे नूर गंज के, ए नूर ना सुमार सिफत ॥५४॥
इन अंदर मोहोल कई नूर के, कई जुदी जुदी नूर जिनस । कई मोहोल मंदिर नूर गलियां, नूर देखों सोई सरस ॥५५॥
इन अंदर नूर कई जुगतें, नूर कई मंदिर मोहोलात । नूर जिनसें कई जुगतें, नूर अर्स गंज कहयो न जात ॥५६॥
फेर देख नूर भोम दस का, होए हिरदे नूर जहूर । महामत मोमिन नूर का, नूर देखे अर्स सहूर ॥५७॥
॥ प्रकरण ॥३६॥ चौपाई ॥२०४४॥
