परिकरमा - प्रकरण ३७ | Parikarmaa prakaran 37
भोम पेहेली नूर खिलवत
कहे आमर नूर अर्स का, ए जो अर्स नूरजमाल । दिल अर्स मोमिन नूर का, नूर सुनके बदले हाल ॥१॥
ताथें नेक कहूं नूर बीच का, नूर भोम तले खिलवत । हक हादी नूर मोमिन, ए नूर गंज हक वाहेदत ॥२॥
बीच नूर चबूतरा, चौसठ थंभ नूर के । फिरता कठेड़ा नूर का, नूर क्यों कहूं नूर बीच ए ॥३॥
ऊपर चंद्रवा नूर का, और नूरै की झालर । ऊपर तले सब नूर में, सब नूरै रूह नजर ॥४॥
बिछौने सब नूर में, और तकिए नूर गिरदवाए । रूहें बैठी नूर भर पूर, रहया नूरै नूर समाए ॥५॥
चरनी सीढ़ियां नूर की, चढ़ उतर नूर झलकार । थंभ पड़सालें नूर की, नूरै के द्वार चार ॥६॥
नूरै के मोहोल मंदिर, नूर दिवालें द्वार । नूरै नकस कटाव नूर, नूर क्यों कहूं बड़ो विस्तार ॥७॥
मुखारबिंद सब नूर के, नूर वस्तर भूखन । सब सिनगार साजे नूर के, नूर कहां लग कहूं रोसन ॥८॥
इत बीच सिंघासन नूर का, नूरै का बिछौना । बैठे जुगल किसोर नूर में, कछू नाहीं न नूर बिना ॥९॥
कई बिध नूर सिंघासन, कई बिध बिछौने नूर । कछू नजरों न आवे नूर बिना, सब दिसा नूर जहूर ॥१०॥
वस्तर भूखन नूर के, सब नूरै का सिनगार । नूरै सागर होए रहया, नूर वार न पार सुमार ॥११॥
नूर बोलत जुबां नूर की, नूर सुनत नूर श्रवन । खुसबोए नूर नासिका, नूर नैन देखे ना नूर बिन ॥१२॥
अंग सारे नूर के, नूरै का नूर आहार । कौल फैल हाल नूर का, हाल-चाल नूर वेहेवार ॥१३॥
नूर मंदिर पेहेली भोम के, नूर रसोई चौक ठौर । ए अंदर नूर द्वार के, कछू नूर बिना नहीं और ॥१४॥
भोम दूजी नूर भुलवनी
दूजी भोम जो नूर की, नूर चेहेबच्चे जल । नूर मन्दिर भुलवन के, नूर एक सौ दस मोहोल ॥१५॥
एक सौ दस हारें नूर की, नूर ऐसे ही गिरदवाए । ए बारे हजार मोहोल नूर के, बीच नूर चौक रहया भराए ॥१६॥
नूर भोम दूजी से तले लग, भरया चेहेबच्चा नूर जल । लंबा चौड़ा नूर एक हांस लग, ऊपर आया नूर बन चल ॥१७॥
नूर तीनों तरफों झलूबिया, तरफ चौथी नूर झरोखे । नूर बन छाया जल पर, खासी बैठक नूर ठौर ए ॥१८॥
नूर झरोखे बैठक, नूर जल नूर ऊपर । नूर झरोखे तीसों मिले, जितथें आवें नूर नजर ॥१९॥
नूर मंदिर तीस इन तले, ताके चार चार नूर द्वार । आगूं तीन गली नूर थंभ की, ए जो मंदिर नूर किनार ॥२०॥
नूर मंदिर एक सौ दस, एक अन्दर की नूर हार । चारों तरफों मंदिर नूर के, ए नूर गिनती बारे हजार ॥२१॥
नूर मंदिर भोम गिनती का, बीच नूर चबूतरा । हक हादी रूहें नूर बैठकें, अति रंग रस नूर भरया ॥२२॥
द्वार जो नूर मंदिर, नूरै के चार चार । लगते द्वार जो नूर के, माहें भुलवनी नूर अपार ॥२३॥
हक हादी रूहें नूर भरे, खेलें नूर में कर सिनगार । नूर बिना कछू न पाइए, नूर झलकारों झलकार ॥२४॥
वस्तर भूखन नूर के, नूर सरूप साज समार । नूर ले खेलें नूर में, नूर झलकारों झलकार ॥२५॥
नूर सरूप देखत दिवालों, नूर सरूप देखत द्वार । नूर सरूप देखत नूर बीच, नूर झलकारों झलकार ॥२६॥
नूर सरूप पैठें एक द्वार से, जाए निकसें नूर किनार । यों नूर सरूप दौड़ें सब में, नूर झलकारों झलकार ॥२७॥
नूर सरूप सब नूर के, ले नूर दौड़ें बारे हजार । बारे हजार नूर मन्दिरों, नूर झलकारों झलकार ॥२८॥
एक नूर मन्दिर से आवत, नूर निकसे परली हार । नूर हँसें खेलें गिरें नूर में, नूर झलकारों झलकार ॥२९॥
नूर सरूप पैठें एक तरफ से, नूर निकसे जाए नूर पार । नूर फिरत बीच गिरदवाए, नूर झलकारों झलकार ॥३०॥
हार किनार पार नूर में, नूर सागर हुआ द्वार द्वार । नूर वार पार या बीच में, नूर झलकारों झलकार ॥३१॥
इन बिध नूर केता कहूं, नूर समें खेलन । नूर बिना कछू न देखिए, नूर के नूर रोसन ॥३२॥
दूजी भोम सब नूर में, रूहें फेर देखें नूर ले । नूर प्याले हक हादी नूर, रूहों भर भर नूर के दे ॥३३॥
भोम तीसरी नूर झरोखा
तीसरी भोम का नूर जो, नूर इन मुख कहया न जाए । बड़ी बैठक नूर इन भोमें, इत नूर आप दीदारें आए ॥३४॥
नूर द्वार नूर ऊपर, नूर बड़ी बैठक नूर भर । कर दीदार नूर-जमाल का, फेर आए नूर-कादर ॥३५॥
ए बैठक कही जो नूर की, सो नूरै नूर गिरदवाए । बीच चौक गली सब नूर की, रहे द्वार मन्दिर नूर भराए ॥३६॥
मुख नूर चौक भर पूरन, नूर दस मन्दिर पड़साल । इन भोम नूर रूहें देखहीं, तो नूर बदले नूर हाल ॥३७॥
अन्दर नूर पड़साल के, नूर द्वार मन्दिर दोए दोए । नूर सीढ़ियां आगूं इन माहें, दोऊ तरफ मेहेराव नूर सोए ॥३८॥
नूर मेहेराव आगूं सीढ़ी नहीं, आगूं बढ़ती नूर पड़साल । नूर मेहेराव इन ऊपर, नूर पड़साल माहें चाल ॥३९॥
और नूर मन्दिर छे द्वार ने, नूर दोऊ तरफों के । ए दसे भोम नूर मन्दिर, नूर पड़साल बराबर ए ॥४०॥
नूर द्वार दोऊ ओर बराबर, नूर द्वार सीढ़ी दोए तरफ । नूर छे चौक आगूं देहरी, रूहें नूर देखें तो बोलें ना हरफ ॥४१॥
ए छे नूर द्वार दाएँ बाएँ, नूर दोऊ तरफों तीन तीन । ए रूहें देखें नूर विवेक, जो देवे हुकम नूर आकीन ॥४२॥
ए बड़ी बैठक नूर पड़सालें, नूर भोम आरोगें बेर दोए । पूर नूर होए रूहें अर्स की, ए नूर बेवरा देखें सोए ॥४३॥
नूर सेज्या-पौढ़ें इतहीं, नूर मोहोल बड़ा ए । इत नूर मेला पोहोर तीन लग, नूर हुकम कहावे जे ॥४४॥
भोम चौथी नूर निरत की
भोम चौथी जो नूर की, नूर में नूर विस्तार । ए नूर कहया तो जावहीं, जो होवे नूर सुमार ॥४५॥
नूर गंज मध्य मन्दिर, नूर चौक ठौर निरत । नूर रात नूर बरसत, रूहें नूर देखें नूर की सूरत ॥४६॥
नूर तखत नूर चौक में, बैठें नूर में जुगल किसोर । नूर सरूप निरत नवरंग, बीच नूर बैठें भर जोर ॥४७॥
नूर खेलत नूर देखत, और नूरै नूर बरसत । रूहें आइयां जो इत नूर से, सो नूर नूरै को दरसत ॥४८॥
नूर मन्दिर द्वार नूर, नूर जिमी चौक थंभ दिवाल । नूर भरपूर नूर में, सब नूरै की हाल चाल ॥४९॥
नूर नूर को देखहीं, नूर की नूर सुनत । नूर नाचत नूर बाजत, नूर कहां लों को गिनत ॥५०॥
नूर बाजे नूर बजावहीं, नूर गावें नूर सरूप । नूर देखें फेर फेर नूर को, नूर नाचत नूर अनूप ॥५१॥
ऊपर तले बीच नूर में, जानूं भरया सागर नूर । दसों दिसा देखों नूर नजरों, जानों तीखे आवें नूर के पूर ॥५२॥
जानों नूर देखों मासूक का, तो जुगल नूर सब पर । सब नूर देखों जित तितहीं, भरी नूरै नूर नजर ॥५३॥
हक नूर बिना जरा नहीं, नूर सब में रहया भराए । नूर बिना खाली कहूं नहीं, रहया नूरै नूर जमाए ॥५४॥
फेर नूर दिवालों देखिए, नूर बन झरोखे जित । नूर खिड़की नूर द्वारने, देख्या नूर बिना न कित ॥५५॥
रूहें दौड़ें नूर हाल में, नूर देखें सब ठौर । फेर आइए नूर द्वार ने, नाहीं नूर बिना कछू और ॥५६॥
भोम पांचमी नूर सेज्या
नूर देखो भोम पांचमी, जित मन्दिर नूर सेज । बारे हजार मोहोल नूर के, सब नूरै रेजा रेज ॥५७॥
नूर पौरी नूर द्वारने, नूर गलियां थंभ अर्स । नूर प्याले रूहें पीवहीं, ले भर भर नूर सरस ॥५८॥
ए नूर के चौक चबूतरे, माहें नूर के मोहोल मन्दिर । नूर सरूप लेहेरें लेवहीं, माहें नूर बाहेर अन्दर ॥५९॥
चौकी संदूकें नूर की, सब सुन्दर नूर सामान । नूर भरे मोहोल सोभित, ए क्यों होए नूर बयान ॥६०॥
सब जोगवाई नूर की, नूरै का सब साज । कहां लग कहूं मैं नूर की, सब नूरै रहया बिराज ॥६१॥
सब मोहोल एक नंग नूर के, ज्यों नूर सागर माहें तरंग । यों कई बिध मोहोल नूर के, माहें कई नूर रस रंग ॥६२॥
ए नूर भोम फेर देखिए, नूर झरोखे नूर बन । नूर द्वार आए फेर, नूर नूरै नूर रोसन ॥६३॥
कई चौक देखिए नूर के, कई सीढ़ियां नूर दिवाल । कई थंभ गलियां नूर की, कई मोहोल नूर पड़साल ॥६४॥
नूर ऊपर तले माहें नूर, कई बेल फूल नूर नकस । घोड़े कमाड़ी नूर चौकठ, भरया सागर नूर रस ॥६५॥
झरोखे नूर गिरदवाए, नूर सोभा कही न जाए । कछू नूर स्वाद तो आवहीं, जो नूर लीजे दिल ल्याए ॥६६॥
नूर मन्दिर फेर देखिए, फेर देखिए नूर झरोखे । तब नूर बन आवे नजरों, नूर पसु पंखी खेलें जे ॥६७॥
भोम छठी नूर सुखपाल
भोम छठी नूर झिलमिले, सब ठौरों नूर नाम । नूर रूहें खेले नूर में, सब रहया नूर में जाम ॥६८॥
नूर चौक मन्दिर फिरते, नूर चबूतरों बैठक । नूर बरसत कई हवेलियां, नूर बैठक रूहें हादी हक ॥६९॥
नूर बैठत नूर उठत, नूर चलते नूर निदान । सब ठौरों नूर पूरन, जानों सब गंज नूर समान ॥७०॥
एक मध्य चौक भरया नूर का, और फिरते मोहोल नूर तिन । तिन गिरद नूर हवेलियां, ए नूर गिनती करूं जुबां किन ॥७१॥
तिन परे नूर नूर के परे, नूर मोहोल की गिनती नाहें । नूर जिनसें कई जुदी जुदी, ए नूर आवे न हिसाब माहें ॥७२॥
जो मोहोल नूर किनार के, नूर लेखे में आवे क्यों कर । ए नूर रूहें देखत, फेर फेर नूर नजर ॥७३॥
मोहोल झरोखे जो नूर के, आवत नूर बयार । इन जुबां इन नूर को, ए नूर आवे न माहें सुमार ॥७४॥
कई मोहोलों में नूर थंभ, तिन कई थंभों नूर नकस । नेक नकस नूर देखिए, जानों ए नूर सबथें सरस ॥७५॥
कई बन बेली नूर की, कई नूर पसु जानवर । कई नूर कटाव तिन बीच में, नूर कहां लग कहूं क्यों कर ॥७६॥
कहयो न जाए नूर पात को, कई नूर कांगरी पात माहें । कई नूर बेली एक पात में, सो कब लग कहूं नूर कांहें ॥७७॥
एक पात कांगरी नूर देखिए, नूर देखत उमर जाए । तो सोभा देखत नूर कांगरी, रूहें नूर क्योंए न तृपिताए ॥७८॥
छठी भोम नूर पूरन, जित रेहेत नूर सुखपाल । बड़ी बड़ी नूर हवेलियां, बड़े बड़े नूर पड़साल ॥७९॥
फेर देखिए नूर द्वार को, मोहोल नूर चौक झलकत । रूहें खेलें खुसाली नूर में, नूर नूरै में मलपत ॥८०॥
भोम सातमी नूर हिंडोले
नूर भरी भोम सातमी, नूर मोहोल बिना हिसाब । बिना हिसाब चौक नूर के, सो भरयो सागर नूर आब ॥८१॥
हिसाब नहीं नूर दिवालों, हिसाब नहीं नूर गलियां । हिसाब नहीं बीच नूर थंभ, नूर आवे नूर बीच से चलियां ॥८२॥
नूर भरे ताक खिड़कियां, बारसाखें नूर द्वार । कई मोहोल मन्दिर नूर के, ना गिनती नूर सुमार ॥८३॥
कई छूटक मन्दिर नूर के, कई मन्दिरों नूर मोहोलात । कई फिरते मन्दिर नूर के, बीच बैठक नूर बिसात ॥८४॥
नूर झरोखे किनार के, तिन में नूर मन्दिर । नूर थंभ दो दो आगूं इन, हर मन्दिर नूर अन्दर ॥८५॥
इन अन्दर मोहोल कई नूर के, कई जुदी जुदी नूर जिनस । कई मोहोल मन्दिर नूर गलियां, नूर देखूं सोई सरस ॥८६॥
ए जो मन्दिर नूर किनार के, दो हारें नूर मन्दिर । साम सामी नूर हिंडोले, नूर झलकत है अन्दर ॥८७॥
यों फिरते नूर हिंडोले, नूरै के गिरदवाए । नूर सरूप रूहें बैठत, झूलें नूर जुगल दिल ल्याए ॥८८॥
दो दो सरूप नूर झूलत, नूर साम सामी मुकाबिल । कड़े झनझनें नूर के, नूर खेलें झूलें हिल मिल ॥८९॥
कई नूर चौक चबूतरे, कई नूर के थंभ दिवाल । कई बार साखे ताके नूर के, क्यों कहूं नूर बिना मिसाल ॥९०॥
कई रंगों नूर झलकत, कई नूर रंग तले ऊपर । सब तरफों नूर जगमगे, ए नूर जोत कहूं क्यों कर ॥९१॥
कई गलियां नूर चरनियां, कई नूर मेहेराव झरोखे । कई नूर अर्स की रोसनी, क्यों सिफत कहूं नूर ए ॥९२॥
भोम आठमी नूर हिंडोले
नूर गंज भोम आठमी, नूर चार तरफ झूलन । चारों चौक नूर हिंडोले, रूहें झूलत नूर रोसन ॥९३॥
गिरदवाए नूर हिंडोले, झलकत नूर जंजीर । क्यों कहूं झूले नूर के, रूहें हँसत मुख नूर नीर ॥९४॥
रूहें झूलें जब नूर में, तब अर्स नूर झलकार । बोलें नूर पड़छंदे नूर मन्दिरों, होत हाँसी नूर अपार ॥९५॥
यों गिरदवाए नूर सबन में, झनकत नूर झलकत । ए जो हिंडोले नूर के, कही जाए ना नूर सिफत ॥९६॥
हक हादी रूहें नूर में, झूलत नूर खुसाल । इन समें नूर बिलंद का, किन विध कहूं नूर हाल ॥९७॥
ए झूले भोम नंग नूर के, गंज जाहेर नूर अम्बार । जब नूर मोहोलों इत खेलत, अर्स नूर न आवत पार ॥९८॥
इन अंदर नूर कई बिध का, नूर बैठक मोहोल खेलन । जुदी जुदी विध नूर जुगतें, हक सुख देत नूर रूहन ॥९९॥
कई विध नूर चबूतरे, कई विध नूर मंदिर । कई विध रोसन नूर किनारे, कई बिध नूर अंदर ॥१००॥
बारे हजार रूहें नूर हिंडोले, हर नूर रूहें हक संग । इन समें नूर क्यों कहूं, नूर होत उछरंग ॥१०१॥
चार चार हिंडोले नूर के, अर्स मावे ना नूर झनकार । लेत लेहेरें नूर सागर, जानों नूर गंज भरे अंबार ॥१०२॥
नूर हिंडोलों जंजीरों, कड़े खटकत नूर जुगत । ए घाए पड़घाए नूर पड़छंदे, नूर हर ठौरों बोलें बिगत ॥१०३॥
भोम नौमी नूर गोख बैठक
भोम नौमी नूर नूरै, गिरदवाए नूर तखत । ए नूर विचारे ना उड़े, हाए हाए नूर जीवरा बड़ा सखत ॥१०४॥
इन नूर भोम की सिफत, कही जाए ना नूर मुख इन । ए नूर मंदिर नूर झरोखे, कई नूर फिरते सिंघासन ॥१०५॥
ए मंदिर झरोखे नूर एकै, फिरती नूर पड़साल । तो कहूं नूर रोसन की, जो होवे नूर इन मिसाल ॥१०६॥
ए मंदिर झरोखे नूर के, भोम नूर बराबर । नूर द्वार ज्यों और मंदिर, नूर रूहें आवें सीढ़ियों उतर ॥१०७॥
हर हांसों हक नूर बैठक, हर हांसों नूर तखत । हक हादी रूहें नूर मिलावा, हर हांसों नूर न्यामत ॥१०८॥
नूर थंभ गली देखिए, जानों नूर मंदिर द्वार । माहें मंदिर झरोखे नूर एकै, हर बैठक नूर विस्तार ॥१०९॥
नूर दूर से देखत, सो नूर बैठक इत । दो सै हांसें नूर की, हक मेले नूर बरकत ॥११०॥
सोभा हक नूर सिंघासन, नूर इन भोम बिराजत । ए बात केहेते हक नूर की, हाए हाए नूर जीवरा न उड़त ॥१११॥
और नूर मोहोल कई अन्दर, सो नूर बड़ो विस्तार । कई नूर भांत बिध जुगतें, नूर अलेखे बेसुमार ॥११२॥
नवे भोम नूर बरनन, नूर क्यों कहूं ख्वाब जुबांए । ए नूर हक हुकम कहे, ना तो नूर आवे ना सब्द माहें ॥११३॥
अर्स नूर जरा जुबां कहे, अर्स मता नूर अपार । सो नूर बरनन क्यों होवहीं, जिन नूर को न कहूं सुमार ॥११४॥
दसमी भोम नूर चांदनी
नूर रूहें चढ़ चांदनी, नूर नवों भोमों पर । खूबी नूर भोम दसमी, ए नूर सोभा ना काहूं सरभर ॥११५॥
ऊपर जल नूर चेहेबच्चे, नूर कारंजे उछलत । ऊपर नूर इत बगीचे, नूर क्यों कहूं हक न्यामत ॥११६॥
इत कई नूर सिंघासन, बीच नूर तखत बैठक । हादी रूहें नूर मिलाए के, बैठत नूर ले हक ॥११७॥
नूर भरया आकास में, सामी आया आकास नूर ले । नूर भरया दरिया नूर का, माहें कई उठें तरंग नूर के ॥११८॥
दो सै एक गुरजें नूर की, नूर गुमटियां बारे हजार । बीच नूर रूहें बैठक, थंभ नूर सोभा अपार ॥११९॥
दसमी भोमे नूर चांदनी, नूर गुमटियां देखत । ए मोहोल गिरदवाए नूर के, नूर में हक हादी रूहें खेलत ॥१२०॥
नूर गुरज हांसों पर, बीच कांगरी नूर किनार । बीच बीच बैरखें नूर की, मौजें आवत नूर झलकार ॥१२१॥
इत सोभित नूर कांगरी, और सोभित नूर कलस । ए कलस कांगरी नूर के, सोभित नूर पर सरस ॥१२२॥
दसों दिसा नूर नूर में, नूरै नूर खेलत । नूर उठें बैठें नूर में, नूर नूरै में चलत ॥१२३॥
नूर भरया आसमान में, नूर चांदनी नूर चौक । नूर बिना कछू न देखिए, नूरै में नूर सौक ॥१२४॥
नूर देख्या भोम दस में, नूर सबहीं के सिरे । नूर ले नौमी भोम में, नूर नूरै में उतरे ॥१२५॥
ए नूर सुख बैठक देख के, नूर भोम आठमी आए । लिए नूर सुख हिंडोले, ए चारों नूर सुखदाए ॥१२६॥
आए नूर भोम सुख सातमी, नूर सुख हिंडोले दोए दोए । ए सुख नूर रूहें बिना, नूर सुख लेवे जो होवे कोए ॥१२७॥
नूर लिया छठी भोम में, भोम अर्स विवेक विचार । मोहोल लिया सुख नूर का, नूर नूर में नूर न सुमार ॥१२८॥
नूर भरी भोम पांचमी, जित नूर सेज्या सुख । रात सुख नूर अति बड़ा, हक सुख नूर सनमुख ॥१२९॥
भोम चौथी नूर में, नट निरत नूर खेलत । नूर बिना कछू न पाइए, सुख सनमुख नूर अतन्त ॥१३०॥
तीसरी भोम जो नूर की, जित है नूर पड़साल । हक हादी रूहें नूर बैठक, आवें दीदारें नूर-जलाल ॥१३१॥
दूसरी भोम का नूर जो, चेहेबच्चा नूर झीलन । हक हादी सुख नूर भुलवनी, देत नूर सुख अपने तन ॥१३२॥
नूर द्वार सुख पेहेली भोमें, सुख अव्वल भोम नूर पूर । फिरता सुख सब नूर में, मध्य नूर नूर नूर ॥१३३॥
इत नूर खिलवत हक की, रूहें नूर मोमिनों न्यामत । नूर मेला मूल मोमिनों, बीच हक का नूर तखत ॥१३४॥
हक हादी रूहें नूर ठौर, हक जात नूर वाहेदत । कहे महामत नूर बिलन्द में, ए अपनी नूर कयामत ॥१३५॥
नूर की परिकरमा तमाम
॥ प्रकरण ॥३७॥ चौपाई ॥२१७९॥
