सेवा पूजा
प्रातःकाल
- सद्गुरु वन्दना- वन्दौ सद्गुरु चरण को
- प्रभाती-
- आवो जी वाला मारे घेर
- उठो रे प्यारे पिया नवल विलासी
- उठि प्रभात निरखिये मुख श्री प्राणनाथ
- जागिये श्री प्राणनाथ प्रातः भयो प्यारे
- प्रातः सुमिरो अक्षरातीत श्याम श्यामा जी साथ रे
- उठापन- रैनि की उनीदी श्यामा पिउ पासे आइया
- झीलना- मारा वाला जी चलो जमुना जल झीलिये
- वन्दना- पूर्ण ब्रह्म ब्रह्म से न्यारे
- चन्दन चढ़ावनी- चलो सखी सुन्दरवर जी ने निरखिये
- मंगल आरती- सुख को निधान जय जय सुख को निधान
- परिक्रमा-
- जुगल स्वरूप रूप छवि छाजे
- पूर्ण ब्रह्म सच्चिदानन्द रूप
- धाम धनी श्री राज हमारे
- परम सुभग आनन्द गुण गाइए
- धाम श्याम श्यामा संग प्यारी
- प्रथम भोम शोभा अति भारी
- मूल स्वरूप किशोर किशोरी
- सरूप- श्री राज श्री ठकुराणी जी
- अरजी छोटी- निसदिन ग्रहिए प्रेम सों
- तीसरी भोम का भोग- तीजी भोम की जो पड़साल
- अचवन- अचवन कीजे कृपा निधान
- बीड़ी- आरोग्या रस रूप युगल धनी
- दाहिनी तरफ का मन्दिर
- श्री जी साहेब जी को स्वरूप
- अरजी बड़ी
- सिनगार आरती-
- बाल भोग- आवो जी मन मोहन प्यारे
दोपहर
- राजभोग- सखियां केतिक वन में जावें
- बीड़ी- पिया बीड़ी लई जिन हाथ सों
- वनों में खेलना- सैयां बैठी जुदे जुदे टोले
- चौथे पहर का उठापन- सब सैयां पोहोर पीछल
सायंकाल
- सद्गुरु वन्दना- वन्दौ सतगुरु चरण को करुं प्रेम प्रणाम
- झीलना- श्री जमुना जी के घाट में
- गौरी-
- नाम माला उर धारो
- समझि बूझि गुरु कीजे
- कृष्ण नहीं अवतारी
- जाऊं कहां महाराज शरण तजि
- प्राणनाथ मन भाये
- मन तुम चलियो निज दरबारा
- छत्रसाल जी ने बाना बांधे
- संध्या स्मरण- संझा सुमरन आरती
- आरती-
- आरती एही है पुराण पुरुख पर
- आरती यह सद्गुरु पर कीजे
- आरती आखिरी इमाम की गाइए
- आरती युगल चिदानन्द केरी
- आनन्द आरती संझा कीजे
- आरती कीजे जय जय अन्त न जाको
- आरती कीजे श्री जी साहेब जी तुम्हारी
- आरती अंग चतुर्दश केरी
- आरती सच्चिदानन्द जी की कीजे
- आरती अक्षरातीत की गाइये
- सद्गुरु स्तुति- जय जय सद्गुरु आरती तेरी
- वन्दना- पूर्ण ब्रह्म ब्रह्म से न्यारे
- सन्ध्या आरती- कंचन थाल चहुं मुख दिवला
- परिक्रमा-
- जुगल स्वरूप रूप छवि छाजे
- पूर्ण ब्रह्म सच्चिदानन्द रूप
- धाम धनी श्री राज हमारे
- परम सुभग आनन्द गुण गाइए
- धाम श्याम श्यामा संग प्यारी
- प्रथम भोम शोभा अति भारी
- मूल स्वरूप किशोर किशोरी
- नवखण्ड आरती- श्री विजयाभिनन्द की आरती
- सरूप- सरूप सुन्दर सनकूल सकोमल
- भोग-
रात्रि
- नृत्य-
- वन्दना- पूर्ण ब्रह्म ब्रह्म से न्यारे
- शयन आरती- आरती करूं मारा वाला जी ने केरी
- मध्य रात्रि का सरूप-
- संझा को अवसर-
- पौढ़ावनी-
- पौढ़ो श्री राज अवार भई है
- मदन मोहन श्याम
- पधारो मेरे वाला जी रंग भरी रैन
- हेली सेजड़ी रे बिछाई
- राज के गुण गाऊं
- रंग परवाली पिया जी को मंदिर
- सोय रहे श्याम सखियन संग मोहोलन
- आनन्द मंगल- सदा आनन्द मंगल में रहिये
विशिष्ट अवसर
- श्री कृष्ण की बधाई- ब्रज में नवमी को श्री राज का प्रगटन
- श्री देवचन्द्र की बधाई- स्यामा जी प्रगटन महोत्सव
- श्री मेहेराज की बधाई- महामति प्रगटन महोत्सव
- वधावो- धन्य घड़ी धन्य राज पधारिया
- समैया बधाई वसन्त आदि- श्री साथ नो सिनगार
- राग वसंत- ऐसो वसंत खेलो मारी सजनी
- गरबा- चलो चलो रे सखियों आज
- हिंडोला- झूले झूले झूले रे
