आरती अक्षरातीत की गाइये
आरती अक्षरातीत की गाइये, जाको नाम लिये सुख पाइये ।
मोह तत्व आदि लों अधःपत होई, जो उपजे सो तो रहे न कोई ॥१॥
अक्षर सोई इच्छा धारी, इच्छा ते उपजे संसारी ॥२॥
जा दर्शन को अक्षर धावे, सेवा सखी तहां सुरत लगावे ॥३॥
आरती अक्षरातीत की गाइये, जाको नाम लिये सुख पाइये ।
मोह तत्व आदि लों अधःपत होई, जो उपजे सो तो रहे न कोई ॥१॥
अक्षर सोई इच्छा धारी, इच्छा ते उपजे संसारी ॥२॥
जा दर्शन को अक्षर धावे, सेवा सखी तहां सुरत लगावे ॥३॥