आरती यह सद्गुरु पर कीजे
आरती यह सद्गुरु पर कीजे, सद्गुरु स्वरूप आप लखि लीजे ॥१॥
सोई सद्गुरु बृज के वासी, बृज बाला संग सदा सुख रासी ॥२॥
सोई सद्गुरु रास विलासी, खेले रास अखण्ड अविनाशी ॥३॥
सद्गुरु श्री देवचन्द्र जी सुहाये, तेज तारतम आप ले आये ॥४॥
सोई सद्गुरु जीवन प्यारे, आदि अन्त लों किये उजियारे ॥५॥
सद्गुरु स्वरूप श्री इन्द्रावती राजे, निज नवरंग संग आप विराजे ॥६॥
