आरती आखिरी इमाम की गाइए
आरती आखिरी इमाम की गाइए, जाको नाम लेत सुख पाइए ।
पहली आरती करूं महंमद पर, जाथें कुरान ल्याए उमत पर ॥१॥
दूसरी आरती ईसा रूह अल्ला, जाथें चौदे तबक पैसल्ला ॥२॥
तीसरी आरती करूं तारतम की, जाथें रोसनाई भई है अन्दर की ॥३॥
चौथी आरती इमाम कहलाए, वेद कतेब दोनों जाहेर लखाए ॥४॥
पांच स्वरूप पिया जाहेर लखाए, वाकी सोभा मुख वरनी न जाए ॥५॥
श्री महामत मेहेर मेहेबूब कहलाए, केसर कदम पकड़ गुन गाए ॥६॥
