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आनन्द आरती संझा कीजे | Aanand aarti sanjhaa kije

आनन्द आरती संझा कीजे, नवल किशोर निरखि सुख लीजै ॥१॥

पहली आरती बृज में वासा, सब सखियन मिलि देख्या तमाशा ॥२॥

दूसरी आरती रास में आये, अक्षर मनोरथ पूरन कराये ॥३॥

तीसरी आरती श्याम सुहाये, सुर असुरन धनी सबहिं मिलाये ॥४॥

चौथी आरती बुधजी मन भाई, तारतम ज्योति करी रोशनाई ॥५॥

पांचवी आरती विजयाभिनंदन, जागनी लीला कलियुग निकंदन ॥६॥

आरती यह श्री महामति गाई, आशा सखी सुनत सुख पाई ॥७॥

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