आरती कीजे श्री जी साहेब जी तुम्हारी | Aarti kije Shri ji Saheb ji tumhari
आरती कीजे श्री जी साहेब जी तुम्हारी, अक्षरातीत तुमहीं गिरधारी ॥१॥
तत्व गुणन को थाल बनाये, मानिक दीवा महाविष्णु धराये ॥२॥
गोत्र पिया के मंगल गाये, निराकार की ज्योति भराये ॥३॥
हीरा नंगन पर परना बसाये, ब्रह्मसृष्टि आनंद सुख पाये ॥४॥
मुकुन्द श्री महामति पिया लखि पाये, साथ पिया पर वारी वारी जाये ॥५॥
