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आशिक होना फिर सोना क्या | Aashiq hona fir sona kya

बन्दे आशिक होना फिर सोना क्या, बन्दे आशिक होना फिर सोना क्या ॥१॥

जब नैनों में नींद आवत है, तकिया और बिछौना क्या ॥२॥

जिस नगरी में दया धर्म नहीं, उस नगरी में रहना क्या ॥३॥

जिस के पिया परदेश बसत हैं, उनका खुश फिर होना क्या ॥४॥

अपने धनी की साहेबी ना जानी, अब माया में रोना क्या ॥५॥

अंगना जान धनी आप जगाया, कर्मकाण्ड से लेना क्या ॥६॥

उठो जागो अब धाम चलें जी, माया सागर में बहना क्या ॥७॥

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