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भोग- पिया रंग रंगीले

पिया रंग रंगीले, रंग मोहोल मेरे आये जू । संग साथ रंगीलो, दुलहिन संग ले आये जू ॥१॥

सिनगार कराय के, सिंहासन पधराये जू । आरती परिकरमा, कर कर फूल वर्षाये जू ॥२॥

चरणों घिसि माथे, पग उर नैन लगाये जू । अति प्रेम आनन्द सों, छप्पन भोग बनाये जू ॥३॥

बहु शाक अथाने, मेवा मधुर मिठाई जू । दधि दूध मलाई, मिश्री अधिक मिलाई जू ॥४॥

पावें पिया प्यारी, सुन्दरसाथ सुहाये जू । पूरन होय पावें, सब के चित्त की चाहे जू ॥५॥

अचवन कर पिया जी को, बीड़ी तो दोऊ आरोगाये जू । पीछे बीड़ी सबन को, सुन्दरसाथ खवाये जू ॥६॥

दिये सुख सबन को, दंपत्ति दोऊ हर्षाये जू । पीछे फूलन की सेज्या, जुगल जीवन पधराये जू ॥७॥

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