भोग- आये श्री राज श्यामा जी मिल के
आये श्री राज श्यामा जी मिल के, क्या मेजबानी कीजे । दीन दुनी सब इस जगत के, रूह कुरबानी कीजे ॥१॥
कदम धोय कर आबे हैयाती, भर भर प्याले पीजे । पाक तखत बैठाए सजन को, दिल दीदों छवि लीजे ॥२॥
मेहेर मुकट सिनगार मेहेर के, देख देख रूहें भीजे । अत्तर उंदक कपूर आरती, ऊपर गुलवर कीजे ॥३॥
देय तवाफ गिरदवाए तखत के, अर्ज खाने की कीजे । मेवा मिसरी मधुर मिठाई, जियावर भोजन कीजे ॥४॥
खटरस व्यंजन सकल अथाने, और दूध दधि लीजे । मधुर अमृत हौज अर्स के, सो जल अचवन कीजे ॥५॥
मुख बीड़ी आरोगाये पान की, साहेब अर्ज सुनी लीजे । मोमिन को तुम कियो है सिफायत, अब बुत कायम कीजे ॥६॥
