भोग- जेंवन आये श्री राज | Bhog- Jevan aaye Shri Raj
जेंवन आये श्री राज, महाराज भवन में ।
दीन दयाल अचल सुखदायक, ब्रह्मसृष्टि सिरताज । नाम श्री महामति आये पद्मावती, सखियां जगावने काज ॥१॥
ले सिर पाग पांवड़ो कीन्हो, छकि रहे सकल समाज । कनक सिंहासन आसन ऊपर, वसन भूखन सब साज ॥२॥
तन मन धन ले न्योछावर कीन्हों, लौकिक लोपानो लाज । दूध दधि और माखन मिश्री, वनफल अनेक इलाज ॥३॥
बहु पकवान मिठाई मेवा, शाक पाक घृत ताज । जेंवत जुगल जोड़ी सुख पावत, साहेब गरीब निवाज ॥४॥
अचवन करि मुख पान सुवासित, सतगुरु सत्य जहाज । मोहन सखी पिया सब विध पूरन, धन धन इत उत आज ॥५॥
