भोग- श्री जू छत्रसाल के आये | Bhog- Shri ju Chhatrasaal ke aaye
श्री जू छत्रसाल के आये, श्री बाई जी संग सुहाये । सखी जान साकुण्डल प्यारी, जाके आये श्री नित्य बिहारी ॥१॥
अपने घर ले पधराये, बहु भांतन कलश धराये । सिर सरस पांवड़े डारे, जब भीतर भवन पधारे ॥२॥
जल युगल चरण रस धोये, तहां मोतिन चौक संजोये । ले युगल तखत बैठाये, बस्तर भूखन पहराये ॥३॥
करि प्रणाम निछावर प्यारी, ले आरती अगर उतारी । खट रस बहु भांति बनाये, नाना विध के भोग लगाये ॥४॥
रस मूंग भात घृत आने, पय सकर दधि अथाने । वरे माड़े बरी मुगौरी, कढ़ी पापर विविध कचौरी ॥५॥
पकवान रसाज बनाई, बहु भांतन मधुर मिठाई । कई विध विध के शाक समारे, जल लेत बीच में प्यारे ॥६॥
पिया जेंवत अति रुचि मानी, पीछे पापड़ बहुत बखानी । आरोग पलंग पिउ आये, साकुण्डल हाथ धुवाये ॥७॥
करी बीड़ी करन खवाये, पग बार बार सिर नवाये । अंग जान सनातन कीन्हों, निज राज आपनो दीन्हों ॥८॥
