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भोग- नंगन जड़ित चौकी पर दोऊ

नंगन जड़ित चौकी पर दोऊ, श्री युगल स्वरूप विराजे । धरो है थाल आगे हित चित सों, षट रस व्यंजन साजे ॥१॥

जेंवत जुगल जोड़ी सुख पावत, अचवाऊं जल झारी । लेत पान पावत हित चित सों, हिरदे सों हितकारी ॥२॥

कोटि जतन ब्रह्मा कर थाके, सो जूठन नहिं पाये । सो जूठन धनी सहज कृपा से, पंचम निशदिन पाये ॥३॥

सेवा पूजा - विषय सूची