भोग- आवत आज सखी मन मोहन | Bhog- Aavat aaj sakhi mann mohan
आवत आज सखी मन मोहन, सुनि मेरो जिया हर्षाये । तोरन बन्धन बांधे भवन में, मोतियन चौक पुराये ॥१॥
प्रेम पांवड़ो में डारूं पिया जी को, सखियन सहित गृह आये । मूंग भात घृत पूड़ी कचौड़ी, व्यंजन जो मन भाये ॥२॥
जेंवत रसिक मनोहर दोऊ, श्री जमुना जल अचवाये । ले बीड़ी पिया सेज पधारे, ज्ञान सखी सुख पाये ॥३॥
