बीड़ी- पिया बीड़ी लई जिन हाथ सों | Bidi- Piya bidi lai jin haath so
पिया बीड़ी लई जिन हाथ सों, सोभित पतली अंगुरी । ता बीच जोत नंगन की, अति झलकत हैं मुंदरी ॥१॥
बीड़ी तो मुख में मोरत, सुंदर हरवटी हंसत । सोभा इन मुख क्यों कहूं, जो पिया बीच में बात करत ॥२॥
एक लालक तम्बोल की, क्यों कहूं अधुर दोऊ लाल । दंत सोभित मुख मोरत, खूबी ना इन मिसाल ॥३॥
लाल उज्जवल दोऊ रंग लिये, बीड़ी लई मुख अंगुरी नरम । नेक मूंदे मुख बोलत, अति सुंदर मुख शरम ॥४॥
नेक खोले अधुर मुख बोलत, करें प्यारी बातें कर प्यार । सो सुख देत हैं आसिकों, जिनको नहीं सुमार ॥५॥
