श्री देवचन्द्र की बधाई- स्यामा जी प्रगटन महोत्सव
सखी तुम गावो री मंगलचार ॥टेक॥
कुंवर बाई की कोख से प्रगटे, श्री श्यामा जी लियो अवतार ॥१॥
गृह गृह तें चलीं भामिनी, गावत मंगलचार । झुमक सब मिलीं आवत जात, साजि सकल सिनगार ॥२॥
मृदंग मंजीरा ढोल दमामा, बाजत बाजे अपार । जय जयकार करत सब कोई, बंदीजन भाट पुकार ॥३॥
चिरंजीवे तेरो बालक माई, सब कहत पुकार पुकार । यहि समान बड़ो नहीं कोई, त्रैलोकी में निरधार ॥४॥
कारज कारण हमरे राज आये हैं, आये बदल आकार । मन वांछित फल दिये सबन को, धणी श्री देवचन्द्र जी दातार ॥५॥
तब के बृज में अब के याहीं, आये धनी करतार । आसानन्द मोहि आस धनी की, जो वतनियों के आधार ॥६॥
