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गौरी- नाम माला उर धारो | Gauri- Naam mala ur dharo

नाम माला उर धारो, साधो भाई, नाम माला उर धारो । संझा समय शुद्ध चित्त करके, धनी को नाम चितारो ॥१॥

चार पदार्थ पाये अमोलक, सो वृथा नहीं हारो । मनुष्य तन दुर्लभ है साधो, सो क्‍यों भूल गुजारो ॥२॥

राज राज मुख रटत रात दिन, स्वासहिं स्वास पुकारो । जिस देही धनी पूरन मिलि हैं, सोई जनम तुम्हारो ॥३॥

कृष्ण सखी मुख राज बखानत, क्षर अक्षर से न्यारो । पूरन ब्रह्म सनातन दोय भुज, मोहन मीत हमारो ॥४॥

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