हिंडोला
झूले झूले झूले रे, मारो राज हिंडोला झूले । कंचन के दोऊ थम्भ मनोहर, डाड़ी चारों अमोलक रे ॥१॥
एक कोरे श्री राज विराजे, बीजी कोरे श्री श्यामा जी रे । जेम जेम साथ झुलावत झूले रे, तेम तेम मारूं मन फूले रे ॥२॥
कहत साकुण्डल अपनी वारी रे, हम लीनी अब तुम ल्यो रे । झूले झूले झूले रे, मारो राज हिंडोला झूले ॥३॥
