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झीलना- मारा वाला जी चलो जमुना जल झीलिये

मारा वाला जी चलो, जमुना जल झीलिये ॥टेक॥

पाट घाट की देहुरि में, जहां रामत कीजे राज । रतन जड़ित के मोहोल में, कीजे रंग विलास ॥१॥

आप अकेले हूजिये, संग श्यामा जी साथ । हम रूहें बारे हजार मिल के, झीलें तुम्हारे पास ॥२॥

कुंज वन की रेती में, पिया चलो दौड़िये जाय । जो जाको छुई लेत है, सो ताके हाथ बिकाय ॥३॥

पीताम्बर कटि काछनी काछे, शीश मुकुट लटकाये । हेम कसब की ओढ़नी ओढ़े, झांझरी घुंघरी घमकाये ॥४॥

फूलबाग और नूरबाग में, चलो बैठिये जाय । लहरी आवे सुगन्ध की, वास रही महकाय ॥५॥

बड़ो वन और लाल चबूतरा, चलो बैठिये जाय । पसु पंखी का मुजरा लेवें, नये नये खेल दिखाय ॥६॥

रसिक राज श्यामा जी के आगे, सखियां नृत्य कराय । जापर चितवत हेत सों, देखत नयन सिराय ॥७॥

हंस के राज खुशी भये, पहराए वनमाल । सखी सकुण्डल अरज करत है, बलि बलि राज कुमार ॥८॥

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