श्री मेहेराज की बधाई- श्री महामति प्रगटन महोत्सव | Mahamati pragtan mahotsav
आज वधाई केसोराय घर, उदयो सूरज सुभान । त्रिलोकी को तिमिर उड़ायो, अद्भुत ज्ञान करी ॥१॥
धन धन नौतनपुरी नगरी, धन धन भादों मास । कृष्ण पक्ष और दिवस चतुर्दशी, पूरन पुंज प्रकाश हो ॥२॥
रविवार पहर दिन चढ़ते, प्रगटे प्राण जीवन हो । जय जय कार वरत्यो वसुधा में, विजयाभिनन्द प्रगट हो ॥३॥
धन धन धनबाई कोख जिन जायो, अखंड सुख सबन हो । आये विलोकन करत हैं सखियां, अति सुख उपज्यो मन हो ॥४॥
जुत्थ जुजवे युवती जोड़े आई, मंगल कलस सजाई हो । धनी निज घर में भय नहीं मन में, उमंग अंग न माये ॥५॥
कुमकुम केसर और अरगजा, अबीर गुलाल उड़ायो हो । अरस परस छिरकत छिरकावत, सुगंध सरस लगाये ॥६॥
गान करत आली चहुं दिसते, मिलि बाजंत्र अनंत बधाई । प्रगट भये श्री महामति केसो घर, अंगना बलि बलि जाई ॥७॥
